पीपल पेड़ पर घट टांगो आंदोलन को लेकर मेयर ने जताया जान पर खतरा

धनबाद : मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल को जान का खतरा है. उन्होंने अपनी हत्या की आशंका जतायी है. एसएसपी को लिखित शिकायत कर कहा है कि कौशल विकास प्रशिक्षण के प्रदाता शुभ दृष्टि, डाटा प्रो व वूमेन डेवलपमेंट के सुनील कुमार वर्मा, राजीव रंजन मिश्रा व जितेश कुमार मेरी हत्या की साजिश रच चुके हैं, जो […]

धनबाद : मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल को जान का खतरा है. उन्होंने अपनी हत्या की आशंका जतायी है. एसएसपी को लिखित शिकायत कर कहा है कि कौशल विकास प्रशिक्षण के प्रदाता शुभ दृष्टि, डाटा प्रो व वूमेन डेवलपमेंट के सुनील कुमार वर्मा, राजीव रंजन मिश्रा व जितेश कुमार मेरी हत्या की साजिश रच चुके हैं, जो अपने आप में एक संज्ञेय अपराध है. इनका यह कदम सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाना भी है. समाचार पत्रों में दिये गये बयान में यह बात स्पष्ट है कि ये लोग मेरी हत्या की साजिश रच चुके हैं, जो जांच का विषय है.
सांठगांठ से करोड़ों रुपये का घोटाला
एसएसपी को दिये शिकायत पत्र में मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने कहा है कि पिछले दिनों सरकारी योजना कौशल विकास प्रशिक्षण की समीक्षा की और पाया कि इस योजना में संबंधित ठेकेदारों (एसटीपी) एवं निगम के पदाधिकारियों द्वारा अनियमितता बरती गयी है एवं व्यापक गड़बड़ी पायी गयी. इस योजना से जुड़े लोगों ने नियमों का उल्लंघन कर सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया. इस अनियमितता को लेकर उप नगर आयुक्त को पत्र लिखा और उनसे जवाब मांगा. मेरे इस कदम से इस योजना से जुड़े एसटीपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बयान दिया कि मेयर की मौत पर वे पीपल के पेड़ पर आठ हजार घट टंगवायेंगे.
विश्वास दिलाने के लिए घट टांगने की बात कही गयी थी : शुभ दृष्टि
शुभ दृष्टि एजेंसी के संचालक सुनील कुमार वर्मा ने कहा कि कागज पर प्रशिक्षण की बात पर पीपल के पेड़ में घट टांगने की बात कही गयी है. चुकीं बाबूडीह में आयोजित रोजगार मेला में सांसद, विधायक व मेयर भी थे. आठ हजार से अधिक छात्र रोजगार मेला में पहुंचे थे. उन्हें विश्वास दिलाने के लिए छात्र व उनके अभिभावकों से पीपल के पेड़ पर आठ हजार घट टांगने की बात कही थी.
कौशल विकास योजना : गाइड लाइन के अनुसार काम नहीं किया
वर्ष 2016-17 में कौशल विकास योजना के तहत 9000 छात्रों का स्किल डेवलपमेंट कोर्स कराना था. वेंचर स्किल प्रा लि, ओरियन एडुकेट, एसजीपी ट्रेनिंग, शुभ दृष्टि, वूमेन डेवलपर्स व डाटा प्रो एजेंसी सहित 28 एजेंसियों का चयन किया गया. छात्रों को ट्रेनिंग के साथ प्लेसमेंट भी करना था. मेयर के मुताबिक एजेंसियों ने गाइड लाइन के अनुसार काम नहीं किया. कागज पर प्रशिक्षण दिखाकर पैसा उठा लिया. इसके पूर्व 2015-16 में भी भारी पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ी गयी थी. तत्कालीन प्रशिक्षु आइएएस माधुरी मिश्रा ने जांच में गड़बड़ी पकड़ी और उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की थी.

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