धनबाद : बीटीए की बेरुखी ने पैदा किये बिचौलिये सप्लाई का पानी काफी, यदि हाथ धो लिये

श्रमिक नगरी भूली में पेयजल की किल्लत बहुत अधिक है, अलबत्ता बीटीए उन्हें पानी की सप्लाई देता है, लेकिन वह अपर्याप्त है. यदि सप्लाई पानी से हाथ-मुंह ही धो लिये तो लगता है कि वह काफी है. फलस्वरूप पानी के दलाल यहां पैदा हुए हैं, जो लोगों को पैसे लेकर पानी उपलब्ध कराते हैं. धनबाद […]

श्रमिक नगरी भूली में पेयजल की किल्लत बहुत अधिक है, अलबत्ता बीटीए उन्हें पानी की सप्लाई देता है, लेकिन वह अपर्याप्त है. यदि सप्लाई पानी से हाथ-मुंह ही धो लिये तो लगता है कि वह काफी है. फलस्वरूप पानी के दलाल यहां पैदा हुए हैं, जो लोगों को पैसे लेकर पानी उपलब्ध कराते हैं.
धनबाद : एक ओर सरकार सबको मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने की कोशिश कर रही है. बिजली व 24 घंटे पानी देने की घोषणा हो रही है. वहीं, दूसरी ओर श्रमिक नगरी भूली के लोग लंबे समय से पानी-बिजली के लिए तड़प रहे हैं.
भूली टाउन एडमिनिस्ट्रेशन (बीटीए) ने गैर-बीसीसीएल कर्मी का बहाना बनाकर पानी सप्लाई नाम मात्र कर रहा है. ऐसे में भूली की लगभग एक लाख की आबादी फिलहाल खरीद कर पानी पीने को मजबूर है. बीटीए की बेरुखी से अब यहां पानी के बिचौलियों का बोलबाला हो गया है.
विधायक की डीप बोरिंग से भी नहीं मिला पानी : बी ब्लॉक जोड़िया के किनारे (पंचवटी नगर) के पास बीटीए का एक डीप बोरिंग व कुआं था. लेकिन, 10 सालों से यह बोरिंग भी बंद हो गयी है. पिछले वर्ष विधायक राज सिन्हा ने दो लाख की लागत से डीप बोरिंग करायी थी.
यहां पर लोगों के लिए नल व पानी कनेक्शन बनाये गये थे. उद्घाटन के बाद एक माह तक लोगों काे पानी मिला. इसके बाद मोटर खराब हो गया. लोगों को अब एक बूंद भी पानी नहीं मिल रहा है. मजबूरी में लोगों को जोड़िया के पानी पर निर्भर होना पड़ करा है.
भूली में 200 चापाकल खराब : पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और नगर निगम की ओर से भूली में 400 से अधिक चापाकल व डीप बोरिंग करायी गयी थी. लेकिन इसमें अधिकांश चापाकल व डीप बोरिंग खराब हो गयी हैं. लेकिन निगम से लेकर पेयजल विभाग को इस पर कोई ध्यान नहीं है. कुछ जगहों पर डीप बोरिंग बची हैं, तो यहां पर पानी के लिए मारामारी है.
बीटीए का ट्रीटमेंट व वाटर प्लांट बन गये खंडहर
भूली में बीटीए के कुल पांच वाटर प्लांट थे. लेकिन, इसमें तीन प्लांट अब खंडहर बन गये हैं. भूली ए ब्लॉक के पास प्लांट से ए, बी व सी ब्लॉक में पानी आपूर्ति की जाती है. लेकिन, यहां पानी नियमित दिनों पर एक बार ही लोगों को मिल पाता है. सबसे खराब हालत तो ई ब्लॉक में हैं. यहां पर पानी कभी 15 तो कभी 20 दिनों के बाद मिलता है. डी ब्लॉक में श्रमिकों के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था. माडा के आने वाले पानी को यहां पर पहले ट्रीटमेंट किया जाता था, इसके बाद क्वार्टर में आपूर्ति करायी जाती थी.

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