धनबाद : ठेकेदारी को लेकर हुई रंजिश में मो मकसूद की गोली मार कर की गयी हत्या मामले में मंगलवार को अपर जिला व सत्र न्यायाधीश चतुर्थ रविरंजन की अदालत ने सजा के बिंदु पर फैसला सुनाते हुए लालूडीह (हरिहरपुर) निवासी जेल में बंद टिकला सिंह को भादवि की धारा 302 में दोषी पाकर उम्रकैद व पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनायी. अदालत ने 19 जुलाई को आरोपी को दोषी करार दिया था.
फैसला सुनाए जाने के वक्त अपर लोक अभियोजक अनिल कुमार सिंह नंबर 1 भी मौजूद थे. ज्ञात हो कि चार मार्च 2015 को हरिहरपुर आरपीएफ बैरेक परिसर में होली मिलन समारोह चल रहा था. रात साढ़े दस बजे प्रोग्राम खत्म हुआ जब अब्दुल कुदुस अपने भाई मकसूद के साथ बैरेक परिसर से बाहर निकला तो घात लगाये टिकला सिंह ने मकसूद की कनपटी पर पिस्तौल सटा कर गोली मार दी. मौके पर ही उसकी मौत हो गयी. घटना के बाद मृतक के भाई अब्दुल कुदुस ने हरिहरपुर थाना में कांड संख्या 18/15 दर्ज कराया था.
रणविजय मामले में बचाव पक्ष की बहस पूरी : नाजायज मजमा बनाकर मारपीट करने के मामले की सुनवाई मंगलवार को न्यायिक दंडाधिकारी ऋतु कुजूर की अदालत में हुई. बचाव पक्ष की ओर से बहस पूरी हो गयी. अदालत ने अभोयजन बहस सह फैसला की तिथि 30 जुलाई मुकर्रर कर दी. अदालत में कई आरोपी गैरहाजिर थे. उनकी ओर से उनके अधिवक्ता ने प्रतिनिधित्व आवेदन दायर किया. गौरतलब है कि 14 मार्च 2011 को कमल सिंह व राकेश सिंह ने कतरास (तेतुलमारी) थाना में प्राथमिकी दर्ज करा कर आरोप लगाया था कि सुबह सात बजे रणविजय सिंह, राजेश सिंह, गुड्डू सिंह, छोटू सिंह, अनिल उरांव व दिनेश रजक एकमत होकर वेस्ट मोदीडीह कोलियरी चेकपोस्ट के पास रंगदारी की मांग को लेकर मारपीट की थी.
