नेताजी का चश्मा टूटा है तो बाबू जगजीवन राम का हाथ

धनबाद : देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आजादी के महानायकों की प्रतिमा शहर में उपेक्षित महसूस कर रही है. कहीं देखरेख के अभाव में प्रतिमा खंडित हो रही हैं, तो कहीं गंदगी व जूठे कप-प्लेट के बीच प्रतिमा अपमानित हो रही हैं. श्रमिक नगरी भूली में बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा, नया […]

धनबाद : देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आजादी के महानायकों की प्रतिमा शहर में उपेक्षित महसूस कर रही है. कहीं देखरेख के अभाव में प्रतिमा खंडित हो रही हैं, तो कहीं गंदगी व जूठे कप-प्लेट के बीच प्रतिमा अपमानित हो रही हैं. श्रमिक नगरी भूली में बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा, नया बाजार में सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा व टाउन हॉल के पास राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा उपेक्षा का दंश झेल रही है.
हर वर्ष जन्मदिवस व पुण्यतिथि पर संबंधित समिति की ओर से कार्यक्रम तो मना लिये जाते हैं. इसके बाद साल भर कोई इधर झांकने तक नहीं जाता. वहीं नगर निगम भी इन प्रतिमाओं की ओर ध्यान नहीं दे रहा है. आइए एक नजर डालते हैं शहर में महापुरुषों की कुछ प्रतिमाओं पर.
नया बाजार : सुभाषचंद्र बोस को टूटा चश्मा
नया बाजार के पास आजादी के महानायक सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा है. कुछ दिन पहले ट्रक के धक्के से प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गया था. इसे नगर निगम ने सीधा तो कर दिया, लेकिन किसी ने चश्मे की जगह बिना शीशे का टूटा चश्मा लगा दिया है. यह काफी अशोभनीय भी लग रहा है. नेताजी ने कभी ऐसा चश्मा नहीं पहना. वहीं चबूतरे के आसपास रेलिंग जगह-जगह टूट गयी है.
भूली : बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा बदहाल
श्रमिक नगरी भूली को बनाने में अहम भूमिक निभाने वाले व देश के प्रथम श्रममंत्री बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा का बायां हाथ टूटा हुआ है. लेकिन किसी को इसकी फिक्र नहीं है. कई जगहों पर प्रतिमा व चबूतरा क्षतिग्रस्त हो रहे हैं. 17 जुलाई 2009 को केंद्रीय श्रमिक संगठन इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, बीएमएस आदि ने प्रतिमा का अनावरण किया था. लेकिन न देखरेख करने वाली समिति इस पर ध्यान दे रही है, न नगर निगम.
टाउन हॉल : गंदगी के बीच डॉ राजेंद्र प्रसाद
देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉराजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा उपेक्षा का शिकार हो रही है. टाउन हॉल के बगल में राजेंद्र पार्क में स्थापित इस प्रतिमा की चारों ओर चाय के जूठे कप व प्लेट पसरे हैं. प्रतिमा अक्सर ताले में ही कैद रहती हैं. नियमित साफ-सफाई नहीं होती है. आसपास में झाड़ व घांस-फूस उग गये हैं. पिछले वर्ष यहां छड़ी टूट गयी थी, किसी तरह अस्थायी तौर पर इसे जोड़ा गया. प्रतिमा का अनावरण 3 दिसंबर 1984 को हुआ था.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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