संजीत मंडल, देवघर: रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ, देवघर में शुक्रवार को स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक शिकागो संबोधन की 133वीं वर्षगांठ श्रद्धा और प्रेरणापूर्ण वातावरण में मनायी गयी. विवेकानंद सभागार में आयोजित समारोह में रामकृष्ण मिशन रेजिडेंशियल कॉलेज, नरेंद्रपुर के अध्यापक जीवन बनर्जी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. कार्यक्रम में विद्यापीठ के सचिव स्वामी जयन्तानन्द जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति रही.
शिकागो भाषण ने दुनिया को दिखाई भारत की आध्यात्मिक शक्ति
मुख्य अतिथि जीवन बनर्जी ने ‘स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषणों से भारत का अभ्युदय’ विषय पर संबोधित किया. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में भारत की आध्यात्मिक दृष्टि, सनातन संस्कृति और मानवीय मूल्यों को पूरी दुनिया के सामने प्रभावशाली ढंग से रखा.
उन्होंने कहा कि विवेकानंद का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है. युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन के साथ राष्ट्र निर्माण में भी योगदान देना चाहिए.
आत्मविश्वास और चरित्र निर्माण पर दिया जोर
जीवन बनर्जी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का संदेश केवल इतिहास का गौरव नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी के लिए जीवन निर्माण और राष्ट्र निर्माण का मार्गदर्शन है.
उन्होंने युवाओं में आत्मविश्वास, श्रद्धा, चरित्र, सेवा भाव और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इन आदर्शों को केवल पुस्तकों और भाषणों तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में उतारना ही स्वामी विवेकानंद को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
युवाओं तक जीवन-मूल्यों को पहुंचाना जरूरी
प्रधानाचार्य स्वामी दिव्यसुधानंद जी महाराज ने मुख्य अतिथि जीवन बनर्जी का परिचय कराया. उन्होंने कहा कि श्री बनर्जी श्रीरामकृष्ण, श्री शारदा देवी और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों के साथ भारत की सनातन संस्कृति और गौरवशाली विरासत के प्रति गहरी निष्ठा रखते हैं.
उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच इन आदर्शों और जीवन-मूल्यों को पहुंचाना बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि श्री बनर्जी की हाल में प्रकाशित पुस्तक में मूल्य आधारित और सार्थक जीवन के लिए प्रेरित करने वाले लेख संकलित हैं.
विद्यार्थियों ने दोहराया 1893 का ऐतिहासिक भाषण
कार्यक्रम की शुरुआत संस्कृत स्तोत्र-पाठ और स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पार्पण से हुई. इसके बाद विद्यार्थियों ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, संदेश और भारत के भविष्य संबंधी उनकी विचारधारा पर भाषण, संस्कृत वक्तव्य, समूहगान और एकल गीत प्रस्तुत किये.
विद्यार्थियों ने 11 सितंबर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म महासभा में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिये गये ऐतिहासिक भाषण का प्रभावपूर्ण पाठ भी किया. इस प्रस्तुति ने समारोह में मौजूद लोगों को विशेष रूप से प्रभावित किया.
‘द ब्रशस्ट्रोक ऑफ होप’ ने बांधा समां
समारोह में विद्यार्थियों ने ‘द ब्रशस्ट्रोक ऑफ होप’ नामक लघु अंग्रेजी नाटक प्रस्तुत किया. नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने आशा, मूल्यों और सकारात्मक सोच का संदेश दिया.
कार्यक्रम का संचालन कुमारद्वीप चक्रवर्ती ने किया. अंत में स्वामी कालिकानंद जी महाराज ने धन्यवाद ज्ञापित किया. समापन गीत के साथ समारोह संपन्न हुआ.
