मधुपुर. शहर के थाना मोड़ स्थित आर्य समाज मंदिर परिसर में दीपावली सह स्वामी दयानंद सरस्वती निर्वाण दिवस मनाया गया. बताया जाता है कि 7 नवंबर 1883 तदनुसार कार्तिक अमावस्या को संध्या समय जब घरों में दीपक जलना शुरू हुआ ठीक उसी समय भारत के भाग्य विधाता महामानव ऋषि दयानन्द सरस्वती ने यह कहते हुए आंखे बंद कर लिया, ” हे ईश्वर तेरी इक्षा पूर्ण हो ” फिर तीन बर ओ३म बोला और धरा पर धर दिया नासवान चोला. इस अवसर पर सर्वप्रथम आर्य पुरोहित प्रकाश चंद्र पंडित वैदिक मंत्र उच्चारण के द्वारा हवन यज्ञ संपन्न कराया गया. इसके बाद भजन एवं सत्संग कार्यक्रम आयोजित किया गया. समाज के संरक्षक के नसीब लाल आर्य ने कहा कि आज के समय में एक एक ओर दयानंद की आवश्यकता है. अंकेक्षक डॉ कैलाश प्रसाद राऊत ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती के विचार आज भी प्रासंगिक है. मंत्री प्रयाग प्रसाद यादव,वरिष्ठ प्रधान व जलेश्वर प्रसाद यादव आदि ने भी अपना अपना विचार रखा. बैजनाथ रजक ने भजनों की प्रस्तुति किया. मौके पर हरिश्चंद्र बारीक, अनीता आर्य, निधि आर्य, चालेश्वर प्रसाद यादव, प्रधान नवीन कुमार शास्त्री, शारदा प्रसाद सिन्हा, शिवम् कुमार, सुशीला देवी समेत दर्जनों महिला, पुरुष व बच्चे थे.
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