सारठ। प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत पत्थरड्डा पहाड़ अपनी प्राकृतिक छटा से लोगों को बरबस आकर्षित करता है. करीब 220 एकड़ में फैला यह पहाड़ नवादा, बोचबांध, बसाहाटांड़ समेत चार पंचायत क्षेत्रों में फैला हुआ है. प्राकृतिक सुंदरता के साथ इसका ऐतिहासिक महत्व भी बताया जाता है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, पत्थरड्डा पहाड़ द्वापर युग और महाभारतकालीन समय की याद दिलाता है. मान्यता है कि पांडवों ने वनवास के दौरान यहां कुछ समय बिताया था. पहाड़ की चोटी पर आज भी महाबली भीम के पदचिह्न होने की बात कही जाती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. पहाड़ पर स्थित झरना और उसका शीतल पानी भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है.
झरने का पानी और दुर्लभ जड़ी-बूटियां बढ़ाती हैं आकर्षण
पहाड़ के ऊपर स्थित झरने से निकलने वाला पानी आसपास के खेतों की सिंचाई में भी उपयोग होता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि झरने के पानी की मिठास अलग है और इसके सेवन से पेट संबंधी समस्याओं में लाभ मिलता है. पहाड़ पर दुर्लभ जड़ी-बूटियां भी पायी जाती हैं, जिन्हें दूर-दराज से वैद्य और जानकार लोग चुनकर ले जाते हैं.
जनवरी समेत विभिन्न अवसरों पर देवघर, जामताड़ा, दुमका और आसपास के जिलों से लोग यहां पिकनिक और वनभोज के लिए पहुंचते हैं. बरसात के बाद पहाड़ की चोटियों पर पड़ती सूर्य की किरणें यहां की खूबसूरती को और बढ़ा देती हैं.
10 करोड़ की योजना वन विभाग की मंजूरी में अटकी
पूर्व स्पीकर सह तत्कालीन विधायक शशांक शेखर भोक्ता ने अपने कार्यकाल में पत्थरड्डा पहाड़ में सिंचाई के लिए 10 करोड़ रुपये की लागत से तालाब और टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स भवन निर्माण की योजना तैयार करायी थी. हालांकि वन विभाग से क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी.
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग
सारठ विधायक उदय शंकर सिंह उर्फ चुन्ना सिंह ने कहा कि पत्थरड्डा पहाड़ को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की मांग विभागीय मंत्री के समक्ष रखी जा चुकी है. विधानसभा के पटल पर भी इस मुद्दे को उठाया गया है. उन्होंने कहा कि यह पहाड़ प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है. पर्यटन के रूप में विकसित होने से यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी. देवघर के नंदन पहाड़, तपोवन और त्रिकुटी के बाद पत्थरड्डा पहाड़ को भी प्रमुख दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है. इसके लिए विभाग की ओर से योजना तैयार की जा रही है.
