सारठ. प्रखंड मुख्यालय में आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कंप्यूटर सहायकों को पिछले एक वर्ष से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. कर्मियों का कहना है कि नियमित भुगतान नहीं होने से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है और कई परिवारों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है.
17 साल से प्रखंड कार्यालय में कर रहे काम
कंप्यूटर ऑपरेटर सरोज चौधरी ने बताया कि वह पिछले 17 वर्षों से प्रखंड कार्यालय सारठ में कार्यरत हैं. पहले प्रखंड कार्यालय से ही भुगतान होता था और किसी तरह की परेशानी नहीं थी. लेकिन पिछले तीन वर्षों से रेडार आउट सोर्सिंग कंपनी के तहत काम कराया जा रहा है. इसके बाद से मानदेय भुगतान में लगातार अनियमितता बनी हुई है.
12 महीने से भुगतान का इंतजार
सरोज चौधरी के अनुसार पिछले 12 माह से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि पहले 13 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था, लेकिन अब यह घटकर 10,500 रुपये हो गया है. इसके बावजूद भुगतान नियमित नहीं हो रहा है. प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक अपनी समस्या रख चुके हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ.
सरोज चौधरी के साथ नजरुल मिर्जा, विजय कुमार और मीणा देवी भी मानदेय नहीं मिलने से परेशान हैं. इसके अलावा जेनरेटर चालक सोहित वर्मा और सहायक भरत वर्मा को भी पिछले 12 माह से भुगतान नहीं मिला है. कर्मियों का कहना है कि कंप्यूटर ऑपरेटरों के बिना कार्यालय का काम एक दिन भी सुचारू रूप से नहीं चल सकता. इसके बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिलना उनके लिए चिंता का विषय बना हुआ है. कर्मियों ने लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान कराने की मांग की है.
