जिस उम्र में बेटियों के हाथ में किताब, कॉपी और कलम होनी चाहिए, जिस उम्र में उनके भविष्य की नींव मजबूत होनी चाहिए, उस उम्र में सारठ की कुछ किशोरियां प्रसव पूर्व जांच के लिए अस्पताल पहुंच रही हैं. सोमवार को सारठ सीएचसी में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हुई एएनसी जांच ने बाल विवाह और किशोरियों के स्वास्थ्य की एक ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा. 150 गर्भवती महिलाओं की जांच में 34 को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (हाइ रिस्क प्रेग्नेंसी) की श्रेणी में चिह्नित किया गया. इनमें पांच की उम्र 15 वर्ष, दो की 16 वर्ष और एक की उम्र 17 वर्ष है. यानी 34 हाइ रिस्क गर्भवतियों में आठ किशोरियां ऐसी हैं, जिनकी उम्र 18 वर्ष भी पूरी नहीं हुई है.
आठ किशोरियां सवाल बनकर अस्पताल पहुंचीं
सीएचसी की जांच सूची में 18 वर्ष से कम उम्र की कई गर्भवती महिलाओं का सामने आना केवल स्वास्थ्य विभाग के लिए एक आंकड़ा नहीं है. यह गांव-समाज और बाल विवाह रोकने के लिए काम करने वाले तंत्र के सामने सीधा सवाल है. अगर 15-17 साल की बच्चियां गर्भावस्था तक पहुंच गयीं, तो बाल विवाह होने से पहले निगरानी किस स्तर पर हुई? सरकार बाल विवाह रोकने और किशोरियों को सुरक्षित रखने के लिए वर्षों से अभियान चला रही है. जागरुकता कार्यक्रम होते हैं, बाल विवाह की सूचना देने और उसे रोकने के लिए तंत्र भी है. फिर भी अस्पताल की जांच में नाबालिग गर्भवतियों का मिलना बताता है कि अभियान की पहुंच और उसकी जमीन पर निगरानी के बीच अभी भी बड़ी खाई है.
कम उम्र में गर्भ, बढ़ता स्वास्थ्य जोखिम
एचआरपी में 18 वर्ष से कम और 35 वर्ष से अधिक उम्र की गर्भवती महिलाओं के साथ एनीमिया, बीपी, शुगर, थायराइड, किडनी और हृदय संबंधी समस्या से जूझ रही महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं. कम उम्र में गर्भधारण किशोरियों के लिए अतिरिक्त स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है.
150 गर्भवती महिलाओं की जांच में 34 मिलीं हाई रिस्क
सोमवार को 150 गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच में 34 हाइ रिस्क प्रेग्नेंसी वाली मिलीं. यह चिंताजनक है. इनकी नियमित निगरानी की जायेगी. सभी को पौष्टिक आहार, पर्याप्त पानी, नियमित बीपी-शुगर जांच की सलाह दी गयी है और किसी भी परेशानी पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेने को कहा गया है. -डॉ प्रज्ञा भगवती
