मधुपुर. शहर के पंचमंदिर रोड स्थित दुर्गा मंदिर के प्रांगण में चल रहे नवाह्न पारायण यज्ञ के साथ श्रीराम कथा में कथा वाचक मधुसूदन शास्त्री ने श्रद्धालुओं के बीच प्रवचन करते हुए कहा कि रामचरित जे सुनत अघाही रस विशेष जाना तिन नाहीं. उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा कितनी पवित्र है और हमारे तन, मन को शुद्ध कर संवारने वाली है. आज के कथा प्रसंग में उन्होंने भगवान शिव की बारात और उनके विवाह का वर्णन इस प्रकार किया की उनके भजनों पर श्रोता झूमने और नाचने पर विवश हुए. श्रीरामचरितमानस के आधार पर कथा प्रवाहित कर रहे प्रवक्ता ने बताया कि शिव विवाह एक आदर्श विवाह के रूप में जाना जाता है. शिव विवाह में बारातियों का वर्णन करते हुए लोगों को भावविभोर कर दिया. बाबा भोलेनाथ को प्राप्त करने के लिए माता पार्वती को कठिन व्रत और तपस्या करनी पड़ी थी. हमें भी अपने जीवन में कुछ भी प्राप्त करने के लिए तपस्या करनी चाहिए यही संदेश है इस शुभ विवाह का. कई प्रसंगों के माध्यम से कथावाचक ने बताया कि उस जीवन को अधूरा माना जाता है, जिसमें हमने हरि नाम का संकीर्तन नहीं किया. कहा कि अपने कार्य के प्रति हमें निष्ठा रखते हुए ईश्वर के प्रति आस्था रखना आवश्यक होता है. तभी जाकर पूर्ण फल की प्राप्ति होती है और हमारा जीवन सफल होता है. कहा कि हमें जीवन में अगर कठिनाइयों से बचना है तो अच्छे विचार और अच्छे कार्य करने चाहिए. अच्छे कार्यों का ही इतिहास बनता है व्यक्ति का इतिहास नहीं बनता उसके कर्मों का इतिहास बनता है. हमेशा हमें इस बात को याद रखना चाहिए और हमें समाज और देशहित में काम करना चाहिए. भगवान श्री राम और श्री रामायण जी की आरती के साथ दूसरे दिन की कथा ने विश्राम लिया गया. हाइलार्ट्स : श्रीरामकथा के दूसरे दिन शिव बारात और विवाह पर झूमे भक्त
राम चरित जे सुनत अघाही रस विशेष जाना तिन नाहीं...भजन पर झूमे श्रोता
मधुपुर के पंचमंदिर रोड स्थित दुर्गा मंदिर के प्रांगण में धार्मिक आयोजन
