देवघर में राशन वितरण की सुस्त व्यवस्था : हर माह लाभुक लगा रहे तीन-चार चक्कर, फिर भी समय पर नहीं मिल रहा अनाज

देवघर में जनवितरण प्रणाली की व्यवस्था लाभुकों के लिए सिरदर्द बन गई है. हर माह लाभुकों को राशन के लिए कई बार दुकानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. अगस्त में भी यही हाल रहा और सितंबर का वितरण अब तक शुरू नहीं हो पाया है.

देवघर : देवघर में जनवितरण प्रणाली की व्यवस्था लाभुकों के लिए हर माह परेशानी का सबब बनती जा रही है. राशन लेने के लिए लाभुकों को एक-दो नहीं, बल्कि औसतन तीन-चार बार पीडीएस दुकानों का चक्कर लगाना पड़ता है. दुकान पहुंचने पर अक्सर एक ही जवाब मिलता है कि खाद्यान्न की आपूर्ति नहीं हुई है. एफसीआइ से नियमित रूप से खाद्यान्न जेएसएफसी के गोदामों तक पहुंच रहा है. लेकिन आखिर पीडीएस दुकानों तक समय पर अनाज क्यों नहीं पहुंचता है.

अगस्त में भी समय पर नहीं पहुंचा खाद्यान्न

अगस्त माह में भी यही स्थिति रही. अगस्त के तीसरे सप्ताह से विभिन्न पीडीएस दुकानों में खाद्यान्न वितरण शुरू हुआ. 31 अगस्त तक वितरण करीब 80 फीसदी ही हो सका. इसके बाद विभाग ने वितरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर पांच सितंबर कर दी. इसके बावजूद समय पर खाद्यान्न नहीं पहुंचने के कारण हजारों कार्डधारी अगस्त का राशन नहीं ले सके.

सितंबर शुरू, वितरण अब भी नहीं

अब सितंबर माह भी शुरू हो चुका है, लेकिन जिले के अधिकांश पीडीएस दुकानों में सितंबर का खाद्यान्न वितरण शुरू नहीं हो पाया है. जिले में 900 से अधिक पीडीएस दुकानें हैं, जहां सभी श्रेणी के 2.40 लाख से अधिक कार्डधारी जुड़े हैं. ऐसे में हर माह वितरण में देरी का सीधा असर बड़ी आबादी पर पड़ रहा है.

जीपीएस नहीं लगे वाहनों से परेशानी का हवाला

जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रीतिलता किस्कू का कहना है कि सभी डीएसडी को समय पर खाद्यान्न आपूर्ति का निर्देश दिया जाता है. कुछ डीएसडी वाहनों में जीपीएस सिस्टम नहीं लगे होने से परेशानी हो रही है. जबकि विभाग ने कई महीने पहले ही सभी वाहनों में जीपीएस लगाने का निर्देश दिया था. लेकिन अब तक सभी वाहनों में जीपीएस नहीं लगा है.

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लेखक के बारे में

By विजय कुमार

विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव है. पिछले 22 वर्षों से लगातार प्रभात खबर से जुड़ा हूं. शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर सिर्फ ग्राउंड रिपोर्टिंग ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जनहित की आवाज बनने का काम किया. बिजली, नगर निगम व कृषि से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने लाकर नीति निर्माण में योगदान दिया. पत्रकारिता की पढ़ाई महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से की.

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