“अनाज खत्म हो गया साहब, क्या खाएं”, गोदाम 100% फुल, PDS दुकानें पड़ीं खाली

देवघर में 100+ PDS दुकानें अगस्त के खाद्यान्न का इंतजार कर रही हैं. गोदाम भरे, पर दुकानें खाली. यह कैसी व्यवस्था है? जानिए पूरी कहानी.

विजय कुमार, देवघर. अगस्त माह खत्म होने को है, लेकिन देवघर प्रखंड समेत जिले के विभिन्न प्रखंडों के 100 से अधिक जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानदारों तक अगस्त माह का खाद्यान्न अब तक नहीं पहुंचा है. रविवार 30 अगस्त को भी कई दुकानों में डीएसडी के माध्यम से अनाज पहुंचाया गया. ऐसे में सवाल सिर्फ खाद्यान्न की आपूर्ति का नहीं, बल्कि इसकी समयबद्धता और पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का है.

जब एफसीआइ से जेएसएफसी के गोदाम तक शत-प्रतिशत खाद्यान्न पहुंच चुका था, तो पीडीएस दुकानों तक समय पर आपूर्ति क्यों नहीं हो सकी? यदि अगस्त माह का खाद्यान्न अगस्त में ही कार्डधारियों के बीच वितरित करना विभागीय अनिवार्यता है, तो आपूर्ति में हुई देरी की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी? 30 अगस्त तक भी कई दुकानों में अनाज पहुंचाने की प्रक्रिया जारी रहने से यह सवाल और गंभीर हो गया है.

बदिया के 429 कार्डधारियों को अगस्त का नहीं मिला अनाज

केनमनकाठी पंचायत के बदिया गांव के डीलर प्रभाकांत पाठक के पास 429 कार्डधारी हैं. उन्हें अगस्त माह का खाद्यान्न अब तक नहीं मिला है. इससे पहले जुलाई माह में भी उन्हें करीब सात क्विंटल कम खाद्यान्न की आपूर्ति की गई थी.

इसी पंचायत के बेहरोकी गांव के डीलर कोदो तुरी के पास 200 से अधिक कार्डधारी हैं. उन्हें भी अगस्त माह का खाद्यान्न अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है. ऐसे में इन दुकानों से जुड़े सैकड़ों कार्डधारियों के बीच अगस्त के खाद्यान्न को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

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पतारडीह में जरूरत 177 क्विंटल, अब तक मिला महज 71 क्विंटल

संग्रामलोढ़िया पंचायत के पतारडीह गांव के डीलर बलराम शर्मा के पास 775 कार्डधारी हैं. इसके अलावा नवाडीह गांव के 210 कार्ड भी इनके साथ टैग हैं. अगस्त माह में इन कार्डधारियों के लिए करीब 177 क्विंटल चावल और गेहूं की जरूरत है.

इसके मुकाबले अब तक करीब 31 क्विंटल गेहूं और 40 क्विंटल पीएच श्रेणी का चावल ही मिला है. वहीं, टैग कार्डधारियों के ग्रीन कार्ड के लिए सिर्फ 18.45 क्विंटल चावल की आपूर्ति हुई है. उपलब्ध खाद्यान्न और कुल जरूरत के बीच बड़ा अंतर व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.

ऑनलाइन रिसीव, जमीन पर खाद्यान्न का अता-पता नहीं

केनमनकाठी पंचायत के बंदा केंदुआ गांव के मिलन एसएचजी के पास 228 कार्डधारी हैं. अगस्त माह में यहां करीब 65 से 66 क्विंटल खाद्यान्न की जरूरत है. संचालक के अनुसार, ऑनलाइन खाद्यान्न रिसीव करा लिया गया है, लेकिन वास्तविक रूप से खाद्यान्न अब तक दुकान तक नहीं पहुंचा है.

इसी तरह देवघर प्रखंड के डीलर गणेश प्रसाद दास के पास करीब 400 कार्डधारी हैं. उन्हें करीब 95 क्विंटल खाद्यान्न की जरूरत है. उनका भी कहना है कि ऑनलाइन खाद्यान्न रिसीव हो चुका है, लेकिन खाद्यान्न दुकान तक नहीं पहुंचा है.

ऑनलाइन रिकॉर्ड में खाद्यान्न की प्राप्ति दर्ज होने और जमीन पर दुकान तक अनाज नहीं पहुंचने की स्थिति ने पूरी आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है.

डीसी से शिकायत के चार दिन बाद पहुंचा खाद्यान्न

देवघर नगर निगम क्षेत्र के डीलर देवेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने 26 अगस्त को खाद्यान्न नहीं मिलने की शिकायत डीसी से की थी. शिकायत के बाद 30 अगस्त की शाम उनके यहां खाद्यान्न पहुंचाया गया. यानी शिकायत के बाद भी आपूर्ति में चार दिन लग गए.

यह मामला इस बात का उदाहरण है कि जब तक शिकायत उच्च स्तर तक नहीं पहुंचती, तब तक संबंधित दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाने की प्रक्रिया कितनी धीमी रहती है.

अगस्त में ही वितरण का दावा, लेकिन बचे कितने घंटे?

जिला आपूर्ति पदाधिकारी कार्यालय की ओर से कहा गया है कि अगस्त माह का खाद्यान्न हर हाल में अगस्त में ही कार्डधारियों के बीच वितरित किया जाना है. लेकिन जिन दुकानों तक 30 अगस्त की शाम खाद्यान्न पहुंच रहा है, वहां कार्डधारियों के बीच वितरण के लिए व्यावहारिक रूप से कितना समय बचा है, यह बड़ा सवाल है.

वहीं, जिन दुकानों तक रविवार शाम तक भी खाद्यान्न नहीं पहुंचा, वहां अगस्त माह का खाद्यान्न कैसे और कब वितरित होगा, इसका जवाब भी जरूरी है. खासकर तब, जब जिले में 100 से अधिक पीडीएस दुकानदार अभी भी आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं.

गोदाम तक अनाज पहुंचने के बाद भी दुकानें खाली क्यों?

पूरी व्यवस्था का सबसे अहम सवाल यही है कि जब एफसीआइ से जेएसएफसी गोदाम तक खाद्यान्न की शत-प्रतिशत आपूर्ति हो चुकी थी, तो पीडीएस दुकानों तक पहुंचने में इतनी देरी क्यों हुई? आपूर्ति श्रृंखला के किस स्तर पर देरी हुई और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी?

कार्डधारियों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना सार्वजनिक वितरण प्रणाली की मूल जिम्मेदारी है. ऐसे में अगस्त खत्म होने के ठीक पहले तक दुकानों में खाद्यान्न पहुंचाने की कवायद व्यवस्था की कार्यप्रणाली और जवाबदेही, दोनों पर सवाल खड़े करती है.

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लेखक के बारे में

By विजय कुमार

विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव है. पिछले 22 वर्षों से लगातार प्रभात खबर से जुड़ा हूं. शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर सिर्फ ग्राउंड रिपोर्टिंग ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जनहित की आवाज बनने का काम किया. बिजली, नगर निगम व कृषि से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने लाकर नीति निर्माण में योगदान दिया. पत्रकारिता की पढ़ाई महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से की.

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