झारखंड के गांवों की कहानियां : एक ऐसा गांव है मठेया, जहां 199 एकड़ जमीन पर मकान तो छोड़िए झोपड़ी तक नहीं

Jharkhand News: झारखंड के देवघर जिले के मोहनपुर प्रखंड की कटवन पंचायत स्थित मठेया गांव में कोई आबादी नहीं है. लोग केवल जमीन पर खेती करते हैं. अंधविश्वास ये है कि यहां मकान की नींव डालने पर घर में किसी की मृत्यु हो जाती है. यही वजह है कि ये इलाका वीरान है.

Jharkhand News: एक-एक इंच की जमीन के लिए लोग एक दूसरे की जान ले लेते हैं. जमीन विवाद को लेकर अक्सर बड़ी घटनाएं हो जाती हैं, लेकिन झारखंड के देवघर से मात्र 15 किलोमीटर दूर एक गांव है मठेया, जहां 199 एकड़ जमीन रहने के बावजूद पूरे गांव में एक मकान तक नहीं है. कोई इस जमीन पर मकान की नींव तक नहीं खोदना चाहता. मोहनपुर प्रखंड की कटवन पंचायत स्थित मठेया गांव में कोई आबादी नहीं है. लोग केवल जमीन पर खेती करते हैं. अंधविश्वास ये है कि यहां मकान की नींव डालने पर घर में किसी की मृत्यु हो जाती है. यही वजह है कि ये इलाका वीरान है.

199 एकड़ में एक झोपड़ी तक नहीं

देवघर के मठेया गांव में कुल 199 एकड़ जमीन वीरान पड़ी है. इस गांव की जमीन के मालिक पड़ोस में कटवन गांव में अपने पैतृक जमीन पर रहते हैं, लेकिन रोड के उस पार मात्र 15 फीट दूर मठेया गांव में कोई गाय का खटाल तक बनाने को तैयार नहीं है. इसके पीछे अंधविश्वास है. गांववालों के अनुसार मठेया गांव में उनके पूर्वजों से ही कोई मकान नहीं बनाता है. कहा जाता है कि अगर यहां मकान की नींव भी डालते हैं तो उनके घर में किसी की मृत्यु हो जाती है. मृत्यु के इस भय और अंधविश्वास के कारण इस गांव में कोई झोपड़ी तक बनाने को तैयार नहीं है. हालांकि घर बनाने के बाद उनके पूर्वज में किसकी मृत्यु हुई है, यह भी गांव वालों को पता नहीं है, लेकिन वर्षों से चले आ रहे इस अंधविश्वास और भय के कारण लोग इससे बाहर नहीं निकल पाये.

Also Read: झारखंड के गांवों की कहानियां: गांव का नाम था ऐसा कि बताने में आती थी शर्म, अब बेहिचक बताते हैं ये नया नाम

आबादीविहीन गांव है मठेया

मठेया गांव के कई जमीन मालिकों को सरकार से प्रधानमंत्री आवास भी स्वीकृत हुआ है, लेकिन वे लोग कम जमीन होने के बाद भी प्रधानमंत्री आवास गांव में ही बना रहे हैं. मठेया में पर्याप्त जमीन होने के बावजूद घनी आबादी में ही रहने को तैयार हैं, लेकिन मात्र 15 फीट दूर मठेया गांव में घर नहीं बनाना चाहते हैं. हालांकि इस गांव में 199 एकड़ जमीन पर वे सालोंभर खेती जरूर करते हैं. बड़ा तालाब में सिंचाई की सुविधा होने की वजह से सालोंभर धान, गेहूं और सब्जी की खेती होती है. शाम होने से पहले सभी किसान खेतों को खाली कर वापस अपने बगल के गांव कटवन लौट जाते हैं. कोई यहां रात में नहीं रुकता है.

Also Read: Jharkhand News: झारखंड में लालू यादव के चरवाहा विद्यालय की जमीन पर अब बनेगा सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज

अंधविश्वास दूर करने की होगी पहल

कटवन पंचायत के पूर्व पंचायत प्रधान हिमांशु शेखर यादव ने कहा कि मठेया में अब तक किसी के द्वारा मकान नहीं बनाना केवल और केवल अंधविश्वास है. इस अंधविश्वास को खत्म करने के लिए पंचायत जल्द पहल करने जा रही है. इस गांव के जिन जमीन मालिकों को प्रधानमंत्री आवास दिया गया है, उनके आवास का निर्माण मठेया गांव में ही शुरू कराया जाएगा. अन्य लोगों को भी अपने-अपने निजी आवास यहां बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा.

रिपोर्ट : अमरनाथ पोद्दार

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >