Jharkhand Municipal Election Results 2026, रांची : संताल परगना के नगर निकाय चुनाव 2026 के परिणामों ने क्षेत्र की शहरी राजनीति में एक स्पष्ट संकेत दिया है कि यहां स्थानीय प्रभाव और व्यक्तिगत लोकप्रियता अभी भी सबसे बड़ा फैक्टर है. कुल 12 निकायों में घोषित परिणामों में छह निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि छह दलगत समर्थित प्रत्याशी विजयी रहे. इससे यह भी साफ हुआ कि राजनीतिक दलों की पकड़ कई निकायों में अपेक्षाकृत कमजोर रही.
भाजपा समर्थित तीन प्रत्याशियों की जीत
भारतीय जनता पार्टी समर्थित उम्मीदवारों ने तीन निकायों में जीत दर्ज की. बरहरवा नगर पंचायत में अर्पिता दास (भाजपा) ने बबिता कुमारी को 1572 वोटों से हराया. महागामा नगर पंचायत में प्रबोध सोरेन (भाजपा) ने राकेश सोरेन को 536 वोटों से पराजित किया. वहीं मिहिजाम नगर परिषद में जयश्री देवी (भाजपा) ने कविता देवी (कांग्रेस) को 3533 वोटों के बड़े अंतर से हराया, जो पूरे संताल परगना में सबसे बड़ी जीत रही.
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झामुमो समर्थित भी तीन उम्मीदवार विजयी
झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थित प्रत्याशियों को तीन निकायों में सफलता मिली. देवघर नगर निगम में रवि राउत (झामुमो) ने रीता चौरसिया (भाजपा) को 5148 वोटों से हराया. वहीं साहिबगंज नगर परिषद में रामनाथ पासवान (झामुमो) ने कपिलदेव दास को 2795 वोटों से हराया. राजमहल नगर पंचायत में केताबुद्दीन (झामुमो) ने भावना गुप्ता को 479 वोटों से पराजित किया.
निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा
इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों का दबदबा सबसे ज्यादा देखने को मिला. पाकुड़ नगर परिषद में शबरी पाल ने सेलिना सुल्ताना शेख को 2353 वोटों से हराया. गोड्डा नगर परिषद में मुकाबला बेहद कांटे का रहा, जहां सुशील रमानी ने मो. कामरान अशर्फी को मात्र 251 वोटों से हराया, जो सबसे कम अंतर वाली जीत रही. दुमका नगर परिषद में अभिषेक चौरसिया ने 667 वोटों से जीत दर्ज की. हालांकि अभिषेक चौरसिया झामुमो के कार्यकर्ता हैं. बासुकिनाथ नगर पंचायत में वीणा देवी ने 2164 वोटों से जीत हासिल की. जामताड़ा नगर पंचायत में आशा गुप्ता ने 974 वोटों से विजय पायी, जबकि मधुपुर नगर परिषद में दरक्शां परवीन ने 989 वोटों से जीत दर्ज की.
महिला प्रत्याशियों का प्रभावी प्रदर्शन
इस चुनाव में महिलाओं की भागीदारी और सफलता दोनों ही उल्लेखनीय रही. बरहरवा, बासुकिनाथ, जामताड़ा, मिहिजाम और मधुपुर जैसे कई निकायों में महिला प्रत्याशियों ने जीत हासिल कर यह संकेत दिया कि शहरी निकायों में आधी आबादी का राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है.
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