प्रमुख संवाददाता, देवघर : कर्नाटक राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड के अध्यक्ष एसइ सुधींद्र ने कहा कि हरित ऊर्जा भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे बड़ा साधन है और झारखंड-कर्नाटक सहयोग से यह लक्ष्य और तेजी से हासिल किया जा सकता है. वे रविवार को झारखंड के देवघर जिले के मोहनपुर के कटवन स्थित बंदरबोना गांव में गोबर आधारित 30 घनमीटर प्रतिदिन क्षमता वाले बायोगैस संयंत्र का निरीक्षण करने पहुंचे थे. अध्यक्ष सुधींद्र ने संयंत्र का संचालन देखा और अधिकारियों इंदुशेखर, संदीप व दीपक से विस्तृत जानकारी ली. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व में कर्नाटक राज्य जैव ऊर्जा की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में तालमेल लाने और सौर-पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर रहा है. उन्होंने कहा : देश में जैव ऊर्जा के सफल क्रियान्वयन की सबसे बड़ी चुनौती स्थायी फीडस्टॉक आपूर्ति है. इसके लिए कर्नाटक निरंतर और गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल के नए विकल्पों पर काम कर रहा है. सुधींद्र ने चीनी उद्योगों में उपलब्ध शीरे से प्रथम पीढ़ी के इथेनॉल उत्पादन को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने झारखंड के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री और अन्य अधिकारियों को कर्नाटक आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि दोनों राज्यों के आपसी सहयोग से 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन का सपना साकार करने में भारत दुनिया को नयी दिशा देगा. हाइलाइट्स कर्नाटक जैव ऊर्जा बोर्ड के अध्यक्ष ने किया देवघर बायोगैस निरीक्षण
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
