मधुपुर. शहर के भेड़वा नवाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में प्रसिद्ध जनकवि सुदामा पांडेय धूमिल व मशहूर शायर निदा फाजली की पुण्यतिथि मनायी गयी. इस अवसर पर दोनों विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किया. इस अवसर पर जलेस के प्रांतीय सह सचिव धनंजय प्रसाद ने कहा कि धूमिल एक विद्रोही कवि थे. उन्होंने हमेशा व्यवस्था चोट करते हुए व जनता की दयनीय दशा पर कलम चलाया और जनपक्षीय सवाल उठाने का काम किया है. वो सही मराने में किसानों व कामगारों के प्रवक्ता थे और सामंती संस्कारों से लड़ने वाले योद्धा के रूप में उभरे. उनका कहना था कि मुश्किल व संघर्ष में अपंग लोग क्रांति व आंदोलन नहीं कर सकता है. उनका मानना था कि यदि ऊंची सुविधाओं के लालची, अपराधी व छलिया व्यवस्था द्वारा पोषित हुए परंपरा व सभ्यता आदि को जैसी-तैसी करने वाले आक्रमक थे धूमिल. उनकी प्रसिद्ध कृति सड़क से संसद तक, बहुचर्चित रही. उन्हें मरणोपरांत साहित्य अकादमी सम्मान मिला. उन्होंने कहा कि निदा फाजली ने अपनी शायरी के माध्यम जमाने को मार्गदर्शिका करते रहे. भला ऐसे विभूतियों को कैसे भुलाया जा सकता है. मौके पर अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किया.
कवि सुदामा पांडेय व निदा फाजली की पुण्यतिथि मनी
मधुपुर के भेड़वा नवाडीह के राहुल अध्ययन केंद्र में आयोजन
