आद्रा नक्षत्र में बाबा बैद्यनाथ को लगा खीर-आम का विशेष भोग, शृंगारी परिवार वर्षों से निभा रहा परंपरा

Deoghar Baba Baidyanath Temple: देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में आद्रा नक्षत्र के अवसर पर खीर और आम का विशेष भोग अर्पित किया गया. शृंगारी परिवार ने परंपरा का निर्वहन किया. विधि-विधान से पूजा के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया. मंदिर में मौसम और पर्व के अनुसार विशेष भोग लगाने की परंपरा जारी है.

देवघर से संजीव मिश्रा की रिपोर्ट

Deoghar Baba Baidyanath Temple: विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर में मौसम, तिथि और पर्व के अनुसार विशेष भोग अर्पित करने की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभायी जा रही है. इसी कड़ी में गुरुवार को आद्रा नक्षत्र के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ को खीर और आम का विशेष भोग अर्पित किया गया. मंदिर प्रशासन और पुजारियों की देखरेख में यह धार्मिक परंपरा संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी अपनी आस्था प्रकट की.

बाबा मंदिर की वर्षों पुरानी परंपरा

बाबा मंदिर से जुड़ी यह परंपरा वर्षों पुरानी है. मान्यता है कि अलग-अलग ऋतु और महीनों के अनुसार भगवान शिव को विशेष प्रकार के भोग अर्पित करने से प्रकृति और धर्म के बीच सामंजस्य बना रहता है. यही कारण है कि बाबा बैद्यनाथ मंदिर में वर्ष भर अलग-अलग अवसरों पर अलग-अलग प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं.

शृंगारी परिवार निभाता है विशेष जिम्मेदारी

मंदिर की परंपरा के अनुसार विशेष भोग तैयार करने की जिम्मेदारी शृंगारी परिवार निभाता है. यह परिवार पीढ़ियों से इस धार्मिक दायित्व का निर्वहन करता आ रहा है. प्रतिदिन अलग-अलग शृंगारी परिवारों की बारी निर्धारित रहती है और उसी के अनुसार भोग की व्यवस्था की जाती है.

मिट्ठू शृंगारी ने तैयार की विशेष खीर

गुरुवार को अपनी निर्धारित बारी के अनुसार, मिठ्ठू शृंगारी ने विशेष खीर तैयार की. पूरी प्रक्रिया पारंपरिक विधि और शुद्धता के साथ संपन्न की गई. मंदिर की मान्यता के अनुसार भोग तैयार करने से लेकर अर्पित करने तक हर चरण में धार्मिक नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है.

श्री यंत्र मंदिर में हुई विशेष पूजा

खीर और आम का भोग तैयार होने के बाद मंदिर के पुजारी राकेश झा ने भीतखंड स्थित श्री यंत्र मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की. वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच बाबा बैद्यनाथ को खीर और आम का विशेष भोग अर्पित किया गया.

भोग अर्पण के बाद बाबा का शृंगार पूजन

भोग अर्पण के बाद बाबा का शृंगार पूजन संपन्न हुआ. इस दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का विशेष वातावरण देखने को मिला. श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया.

वर्ष भर अलग-अलग भोग की परंपरा

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में केवल आद्रा नक्षत्र ही नहीं बल्कि वर्ष के विभिन्न अवसरों पर अलग-अलग प्रकार के भोग अर्पित करने की परंपरा है. सावन माह में बाबा को पुड़ी और आलू की भूजिया का भोग लगाया जाता है. रथ यात्रा के अवसर पर खीर अर्पित की जाती है. इसी प्रकार माघ माह में खिचड़ी, वैशाख माह में जौ-चना का सत्तू, दही और गुड़ तथा अग्रहण मास में दही-चूड़ा का भोग लगाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. इन सभी भोगों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है. मंदिर से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह परंपरा स्थानीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

दुर्गा मंडप में तैयार होता है विशेष प्रसाद

विशेष अवसरों पर अर्पित किए जाने वाले भोग को बाबा मंदिर परिसर स्थित दुर्गा मंडप में तैयार किया जाता है. यहां पारंपरिक तरीके से प्रसाद और भोग की सामग्री बनाई जाती है. इसके बाद धार्मिक विधि-विधान के साथ उसे बाबा को अर्पित किया जाता है.

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श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित

पूजा संपन्न होने के बाद यही भोग श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. श्रद्धालु इसे बाबा का आशीर्वाद मानकर ग्रहण करते हैं. मंदिर प्रशासन के अनुसार वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और समर्पण के साथ निभायी जा रही है, जिससे बाबा बैद्यनाथ धाम की धार्मिक गरिमा और आध्यात्मिक पहचान बनी हुई है.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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