फ्लोरोसिस की चपेट में मनुष्य हो जाता है असमय ही वृद्ध: डॉ सिंह

दुमका: मुख्य वक्ता व विषय विशेषज्ञ के रुप में मगध विश्वविद्यालय के रसायन एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ बिहारी सिंह ने इससे होनेवाली बीमारियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि फ्लोरोसिस मनुष्य को तब होता है जब वह मानक सीमा से अधिक घुलनशील फ्लोराइड-युक्त पेयजल को लगातार पीने के लिये व्यवहार में लाता […]

दुमका: मुख्य वक्ता व विषय विशेषज्ञ के रुप में मगध विश्वविद्यालय के रसायन एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ बिहारी सिंह ने इससे होनेवाली बीमारियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि फ्लोरोसिस मनुष्य को तब होता है जब वह मानक सीमा से अधिक घुलनशील फ्लोराइड-युक्त पेयजल को लगातार पीने के लिये व्यवहार में लाता रहता है. भारत में फ्लोरोसिस पांव पसार चुकी है और दिन-प्रतिदिन इसका स्वरूप विकराल ही होता चला जा रहा है. उन्होंने बताया कि अशिक्षित, गरीब व कुपोषित ग्रामीणों में फ्लोरोसिस की बीमारी बहुत ही जल्दी पनप जाती है. फ्लोरोसिस की चपेट में आकर मनुष्य असमय ही वृद्ध होने लगता है, उसकी कमर झुकने लगती है और वह चलने-फिरने से लाचार हो जाता है. फ्लोरोसिस की वजह से अस्थियां ही नहीं दांत भी कमजोर हो जाते है.

उन्होंने बताया कि नये अनुसंधान से यह सामने आया है कि फ्लोरोसिस का असर किडनी, लीवर सहित शरीर के अन्य आंतरिक अंगों में भी होती है. फ्लोराईड भूमि के अंदर एक निश्चित सतह एवं निश्चित भूखंडों में पायी जाती है. सरकार ऐसे क्षेत्रों में फ्लोराइड रिमुवल सेंटर एफआरसी खोल रही है. वाटर प्यूरिफायर के इस्तेमाल पर बल देते हुए उन्होंने चापानल के पानी का डिफ्लोराईजेशन पर भी बल दिया. उन्होंने बताया कि देश के 20 राज्य फ्लोरोसिस से ग्रसित है. बिहार एवं झारखंड के पिछड़े इलाका इससे अधिक प्रभावित है. झारखंड के संताल परगना व छोटानागपुर के क्षेत्र इससे प्रभावित हैं. वहीं पिछड़ा आयोग बिहार के चेयरमैन सह रिटायर्ड जस्टिस धर्मपाल सिन्हा ने लीगल फ्रेमवर्क एवं सोशल जस्टिस पर व्याख्यान दिया. उन्होंने लीगल फ्रेमवर्क पर बोलते हुए कहा कि एक्ट के खिलाफ कोई कानून नहीं बन सकता है. उसी प्रकार सामाजिक न्याय हम सभी को करने की आवश्यकता है. दोनों अलग-अलग सिक्के के दो पहलू है. उन्होंने कहा कि कोई कार्य तत्परता, वास्तविकता, सदभावना एवं सौहादर्यपूर्ण होना चाहिए. उन्होंने व्यवस्था सुधार से संबंधित कई पहलुओं पर प्रकाश डाला और कहा कि जातीय सर्वे प्रत्येक 10 वर्षों में होनी चाहिए, जिससे पिछड़े लोगों एवं समुदाय को मौका मिल सके.

इससे पूर्व कुलपति डॉ कमर अहसन ने लीगल फ्रेमवर्क एडं सोशल जस्टिस एवं इनवायरमेंटल साईंस को एक ही प्रकार का विषय बताया. कहा कि वातावरण प्रदुषण का सामाजिक कुप्रभाव पड़ता है. वह चाहे जल हो या अन्य प्रदूषण. इनका संरक्षण समाज के समृद्ध वर्ग कर सकते है. वातावरण का कुप्रभाव सबसे ज्यादा गरीब लोगों पर पड़ता है. गरीबों को सामाजिक लागत का वहन करना पड़ता है. जिससे रोकने के समृद्ध एवं बुद्धिजीवी वर्ग को आगे आने की आवश्यकता है. स्वागत भाषण एसपी कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ गगन ठाकुर ने किया. उन्होंने विषय प्रवेश भी किया. , जबकि मंच संचालन लॉ कार्डिनेटर डॉ अजय सिन्हा ने किया. मौके पर डॉ हशमत अली, डॉ राजेन्द्र पांडेय आदि मौजूद थे.

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