संशय खत्म होने के बाद श्रद्धा जन्म लेती है : स्वामी व्यासानंद

देवघर : महर्षि मेंही राष्ट्रीय संतमत समिति की ओर से केके स्टेडियम में रविवार से नौ दिवसीय श्रीराम कथा शुरू हुआ. इसमें महर्षि मेंही ब्रह्म विद्यापीठ हरिद्वार के स्वामी व्यासानंद जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि संशय सब कुछ नष्ट कर देता है. संशय खत्म होने के बाद श्रद्धा जन्म लेती है. माता सती […]

देवघर : महर्षि मेंही राष्ट्रीय संतमत समिति की ओर से केके स्टेडियम में रविवार से नौ दिवसीय श्रीराम कथा शुरू हुआ. इसमें महर्षि मेंही ब्रह्म विद्यापीठ हरिद्वार के स्वामी व्यासानंद जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि संशय सब कुछ नष्ट कर देता है. संशय खत्म होने के बाद श्रद्धा जन्म लेती है.
माता सती के पिता घमंडी थे. वह राजा होते हुए भी नम्र नहीं हो पाये. उनके घर में संशय के रूप में माता सती ने जन्म लिया. उनके यज्ञ के हवन कुंड में माता सती कूद कर जान दे देती है. पुन: सती माता ही हिमालय व मैना के पुत्री के रूप में श्रद्धा रूपी पार्वती जन्म ली. पार्वती के पिता हिमालय यानी स्थिर व मां मैना अर्थात मैं ना घमंडरहित है. वह हर काम के लिए भगवान को ही श्रेय देती थी. खुद श्रेय नहीं लेती थी. महाराज जी ने सर्वप्रथम रामायण ग्रंथ की महत्ता पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि रामचरितमानस वैदिक धर्मावलंबियों के लिए वंदनीय व पूजनीय सदग्रंथ है. इसके श्रवण मात्र से मनुष्य जीवन में पारमार्थिक संस्कार उदित होते हैं.
भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं. उन्होंने राज्य सत्ता का त्याग कर संसार के प्राणियों को शिक्षा दी कि सांसारिक पद, धन, दौलत, विषय भोग सच्चे सुख-शांति प्रदान करने में सामर्थ नहीं है. कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के श्रवण सुल्तानिया, सचिव प्रकाश कुमार अग्रवाल, रघुवीर सिंह, शिवनंदन मंडल, लक्ष्मण वर्णवाल, सुनील कुमार, मनोज सिंह, राजेश श्रृंगारी, श्याम बाबा, पं आचार्य राज कुमार खवाड़े, बमशंकर वर्णवाल, कांता सुल्तानियां आदि ने सराहनीय भूमिका निभायी.

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