देवघर : दो साल पहले पालोजोरी निवासी भरत भंडारी की हत्या के मामले में बुधवार को सेशन जज दो अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने फैसला सुनाया. हत्या में दोषी पाते हुए करौं निवासी लखन भंडारी सश्रम उम्रकैद की सजा सुनाई गयी. साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. जुर्माने की राशि मृतक भरत भंडारी के माता-पिता को दी जायेगी. यह राशि अदा नहीं करने पर दोषी को अलग से एक वर्ष की साधारण सजा काटनी होगी.
यह फैसला दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद भरी अदालत में दिया गया. फैसला सुनने के लिए दोनों पक्षकारों के लोग कोर्ट परिसार में मौजूद थे. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से अपर लोक अभियोजक ब्रह्मदेव पांडेय ने नौ गवाहों को प्रस्तुत किया व दोष सिद्ध करने में सफल हुए.
बचाव पक्ष से अधिवक्ता उमेश यादव ने पक्ष रखा, लेकिन दोषमुक्त कराने में विफल रहे. यह मुकदमा मृतक के पिता दिलीप भंडारी ने पालोजोरी थाना में 14 अगस्त 2017 को दर्ज कराया था. इस घटना के संबंध में दर्ज एफआइआर में कहा है कि सूचक का 17 वर्षीय पुत्र बाइक से बाजार जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं आया तो खोज-बीन करने लगे. इसी क्रम में किसी ने सूचना दी कि उनका पुत्र जख्मी हालत में जयनगरा गांव के पास जख्मी हालत में पड़ा है.
ऑटो करके सूचक व उनके परिजन वहां पहुंचे तो जख्मी हालत में पुत्र को पाया. जख्मी भरत भंडारी को घटना के बारे में उनके पिता ने पूछा तो कहा कि बीरबल के बहनोई लखन भंडारी ने मारा है. परिजनों ने इलाज के लिए पालोजोरी अस्पताल ले गया जहां से देवघर सदर अस्पताल रेफर कर दिया. देवघर सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
इस घटना को लेकर थाना में एफआइआर दर्ज हुआ. जिसमें आशंका जताई गयी कि अवैध संबंध के चलते इनकी हत्या कर दी गयी थी. पुलिस ने अनुसंधान कर इसमें आरोप पत्र दाखिल किया व केस काे सेशन ट्रायल के लिए भेजा गया जहां पर सश्रम उम्रकैद की सजा दी गयी व एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया. मृतक पालोजोरी थाना के नगरिया गांव का रहने वाला था.
