विभाग की भूल बना 2.30 करोड़ का पुल

सारठ : सोनारायठाढ़ी प्रखंड के खिजुरिया- खरवारी पथ के खरवारी नाला पर 2.30 करोड़ की लागत से पीएमजीएसवाइ के तहत उच्चस्तरीय पुल बनकर तो तैयार हो गया. लेकिन, पुल निर्माण में के दो साल बाद भी विभाग एक एप्रोच पथा नहीं बना सका. बताते चलें कि ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से बरमसिया- बिंझा पथ […]

सारठ : सोनारायठाढ़ी प्रखंड के खिजुरिया- खरवारी पथ के खरवारी नाला पर 2.30 करोड़ की लागत से पीएमजीएसवाइ के तहत उच्चस्तरीय पुल बनकर तो तैयार हो गया. लेकिन, पुल निर्माण में के दो साल बाद भी विभाग एक एप्रोच पथा नहीं बना सका. बताते चलें कि ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से बरमसिया- बिंझा पथ के खरवरिया नाला पर बनने वाले इस पुल का शिलान्यास गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे ने तीन फरवरी 2013 को किया गया था. कार्य का संवेदक केके बिल्डर जमशेदपुर को नियुक्त किया गया था. विभाग ने पुल तो बनवा दिया परंतु निर्माण कार्य के दो साल बीत जाने के बाद भी आज तक एप्रोच पथ नहीं बनाया जा सका.

एप्रोच पथ निर्माण नहीं होने के कारण ग्रामीणों के उपयोग में यह पुल नहीं आ रहा. यहां से कोई बड़ा वाहन भी प्रवेश नहीं कर पाता है. ग्रामीणों ने मिट्टी को जैसे-तैसे भर कर पैदल चलने लायक बना लिया है. बताया कि पुल का डीपीआर तैयार करते समय अभियंताओं की ओर से स्थलीय जानकारी लिए बिना ही प्राक्कलन के बना डाला. पुल के एक तरफ जमाबंदी जमीन रहने के कारण रैयत की ओर से एप्रोच पथ अपने जमीन पर बनाने नहीं दिया. जिस कारण आज तक पुल निर्माण के उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है.

कहते हैं ग्रामीण
खरवरिया गांव के ग्रामीण सफरूउद्दीन अंसारी, इकबाल मियां, मोजिब अंसारी, जमशेद अंसारी, इनाएल अंसारी, संलीम अंसारी आदि ने कहा कि विभाग ने बिना सरजमीं पर आये ही पुल का डीपीआर तैयार कर दिया. जिसका खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं. विभाग के दो खर्च करने के बाद भी आवागमन के लिए उपयोग नहीं हो पा रहा है.
कहते हैं कार्यपालक अभियंता
पुल एक तरफ जमाबंदी जमीन है. रैयत जमीन देना नहीं चाहते हैं. भू अर्जन विभाग को भी जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे खारिज कर दिया गया. क्योंकि, आरइओ पथ के लिए सरकार भूमि अधिग्रहण की राशि नहीं देती. संवेदक को कहा गया कि जमाबंदी रैयत काे समझा-बुझा कर जमीन लेकर एप्रोच पथ पूरा कराये. डीसी को भी जानकारी दी गयी है.
विजय कुमार सर्राफ, कार्यपालक अभियंता

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