सावन खत्म होते ही प्रशासन मस्त यातायात व्यवस्था ध्वस्त, जनता पस्त

देवघर : श्रावणी मेला के खत्म होते ही प्रशासन सुस्त पड़ गयी है. यातायात ध्वस्त हो गयी. जनता पस्त हो रही है. सुस्त प्रशासन का फायदा बस व ऑटो संचालक जम कर उठा रहे हैं. देवघर में यातायात व्यवस्था चरमरा गयी है. शहर के रिहायशी मुहल्ले में भी बस, मैक्सी, टेंपो स्टैंड बन गया है. […]

देवघर : श्रावणी मेला के खत्म होते ही प्रशासन सुस्त पड़ गयी है. यातायात ध्वस्त हो गयी. जनता पस्त हो रही है. सुस्त प्रशासन का फायदा बस व ऑटो संचालक जम कर उठा रहे हैं. देवघर में यातायात व्यवस्था चरमरा गयी है. शहर के रिहायशी मुहल्ले में भी बस, मैक्सी, टेंपो स्टैंड बन गया है. धड़ल्ले से सभी गाड़ियों का परिचालन हो रहा है. इसका खामियाजा शहरवासी को उठाना पड़ रहा है. इसमें सबसे दयनीय स्थित मंदिर व शिवगंगा के आसपास का एरिया है. इन क्षेत्रों में पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है. सड़क पर चलना मुश्किल है. लोगों को पांच मिनट की दूरी तय करने में आधा घंटे तक लग रहे हैं. भगवान के भरोसे ही बीमार व्यक्ति किसी डॉक्टर के पास जा सकता है.

छात्र-छात्राओं को हो रही दिक्कत
श्रावणी मेला खत्म होते ही स्कूल-कॉलेज व इंस्टीट्यूट खुल गये हैं. लड़कियां भी घरों से बाहर निकलने लगी है. उन्हें स्कूल-कॉलेज व ट्यूशन के लिए आना-जाना पड़ रहा है. इसमें अधिकांश छात्र-छात्राएं साइकिल से आना-जाना करते हैं. बम बम बाबा पथ में भूरभूरा मोड़ से शिवगंगा तक अवैध तरीके से टेंपो, सफारी, मार्शल व बसों के अवैध पार्किंग व परिचालन से परेशानी हो रही है.
मातृ मंदिर चौक से शिवगंगा तक है नो इंट्री जोन
मातृ मंदिर चौक पर गर्ल्स स्कूल को देखते हुए जिला प्रशासन ने नो इंट्री जोन घोषित कर रखा है. बावजूद शिवगंगा तट स्थित सार्वजनिक भारती पुस्तकालय तक सवारी उठाने के लिए बस पहुंच जाती है. इससे पूरा सड़क जाम हो जाता है. इससे लड़कियों को भारी परेशानी हो रही है.
शहर में इन जगहों पर बना है अवैध पार्किंग का अड्डा
शिवगंगा तट, हरिहर बाड़ी कॉलोनी, पंडित शिवराम झा चौक, बिलासी मुख्य रोड, सीडी द्वारी पथ, शीतल मल्लिक रोड, मातृ मंदिर चौक, बमबम बाबा पथ, लक्ष्मीपुर चौक, दु:खी साह लेन, रघुनाथ रोड, गुरिया चौक आदि दो दर्जन जगहों में अवैध पार्किंग लगता है.
नये यातायात डीएसपी के लिए चुनौती
बुधवार को अजय कुमार सिन्हा यातायात के नये डीएसपी बने हैं. लोगों में एक बार फिर उम्मीद है कि बसों के अवैध परिचालन से मुक्ति मिलेगी. अब देखना है कि नये डीएसपी कितने हद तक अवैध बस परिचालन को रोकने में सफल हो पाते हैं. उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

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