देवघर : संक्रांति तिथि पर बिल्व पत्र प्रदर्शनी के साथ मास व्यापी बांग्ला श्रावण का समापन हो गया. प्रदर्शनी के उपरांत वर्षों से चली आ रही परंपरा अनुसार साढ़े सात बजे अरघा खोला गया. उसके बाद पुरोहित समाज की ओर से बिल्व पत्र अर्पण कर बाबा भोले की स्पर्श पूजा की. उसके बाद अरघा लगाकर आम भक्तों के लिए जलार्पण प्रारंभ किया गया.
बांग्ला श्रावण की अंतिम दिन मुख्य रूप से बरनेल समाज, मनोकामना बिल्व पत्र समाज के दो, मशानी समाज के दो, जरनेल समाज, छोटा जरनेल समाज, शांति अखाड़ा समाज व राजाराम समाज ने प्रदर्शनी लगायी. परंपरा है कि तीर्थ पुरोहित समाज के लिए अनोखे बिल्व पत्र तोड़ने दूर जंगलों व पहाड़ों पर जाते हैं. वहीं प्रदर्शनी के बाद बाबा पर बिल्व पत्र चढ़ाने की परंपरा पुरोहित समाज में संत की दर्ज प्राप्त बमबम बाबा ब्रह्मचारी के द्वारा प्रारंभ की गयी थी, जो कि आज तक जारी है.
