देवघर : पिछले कुछ वर्षों में नदियों का सीना छलनी कर जिस प्रकार बालू का खनन किया गया. नदियों में अनगिनत बोरिंग किये गये. उसका नतीजा सामने है. तेजी से नदियों का जलस्तर नीचे खिसकता गया. जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने पहले डढ़वा नदी में बालू खनन की वजह से जलस्तर काफी नीचे बताया.
अब पीएचइडी के कन्सलटेंट ने अपनी फिजीब्लिटी रिपोर्ट में अजय नदी में जलापूर्ति के लायक पानी की कमी बतायी है. फिजीब्लिटी रिपोर्ट के अनुसार, अजय नदी में इतना पानी नहीं बचा है कि यहां ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप के जरिये घर-घर जलापूर्ति की जाये. अजय नदी में 15 मीटर नीचे गहराई में पानी जा चुका है. नदी में कुआं बनाकर पानी स्टोर अब नहीं किया जा सकता है. इस रिपोर्ट के बाद पीएचइडी ने देवघर व सोनारायठाढ़ी प्रखंड के लिए बहुद्देश्यीय ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना को रद्द कर दिया है.
राज्य सरकार की योजना से देवघर प्रखंड में 23 पंचायत के सभी गांवों में 1,61,000 व सोनारायठाढ़ी प्रखंड के 12 पंचायत के सभी गांवों में कुल 85,000 आबादी के घर-घर कनेक्शन देकर पाइप से जलापूर्ति की योजना बनायी गयी थी, इसके लिए दोनों प्रखंड से गुजरी अजय नदी में कुआं व पाइप के जरिये जलापूर्ति का डीपीआर बनना था. पीएचइडी ने डीपीआर बनाने के लिए कन्सलटेंट की बहाली कर तो दी, पर कन्सलटेंट ने अपने तकनीकी एक्सपर्ट से जब अजय नदी में पानी का आकलन किया तो नदी में पानी ही नहीं पाया. अजय नदी में बालू के लगातार खनन से जलस्तर तेजी से घटता गया.
