टेंपो की धरपकड़ आज से निगम व टेंपो संघ आमने-सामने

देवघर : टेंपो चालकों पर शिकंजा कसने के पूर्व के बयान पर नगर निगम कायम है. वह एक-दो दिन मोहलत देने के लिए तैयार है, पर पैसे में छूट देने को तैयार नहीं है. इधर, टेंपो चालक संघ ने चालकों द्वारा एकमुश्त वार्षिक शुल्क 1800 रुपये देने से मना कर दिया है. ऐसे में नगर […]

देवघर : टेंपो चालकों पर शिकंजा कसने के पूर्व के बयान पर नगर निगम कायम है. वह एक-दो दिन मोहलत देने के लिए तैयार है, पर पैसे में छूट देने को तैयार नहीं है. इधर, टेंपो चालक संघ ने चालकों द्वारा एकमुश्त वार्षिक शुल्क 1800 रुपये देने से मना कर दिया है. ऐसे में नगर निगम और संघ के बीच जिच जारी है. निगम की ओर से सिटी मैनेजर ने सीधे तौर पर कहा कि सीइओ देवघर में नहीं हैं. ऐसी हालत में टेंपो चालकों को राहत के तौर पर एक-दो दिन का समय बढ़ाया जा सकता है,

लेकिन राशि में कोई छूट नहीं मिलेगी. टेंपो चालकों को एकमुश्त 1800 रुपये वार्षिक शुल्क देने से प्रतिदिन पांच रुपये से भी कम पड़ रहा है. वह पहले से पांच रुपये दे रहे हैं. निगम ने टेंपो चालकों के हित में निर्णय लिया है. वहीं टेंपो संघ के देवघर के अध्यक्ष सह वार्ड पार्षद आशीष झा ने कहा कि टेंपो संघ और निगम के पास पहले से सहमति है. वह अपने वायदे से मुकर रहा है.

पूर्व मेयर राज नारायण खवाड़े व एमपी निशिकांत दूबे की मध्यस्थता में तत्कालीन सीइओ अवधेश कुमार पांडेय ने टेंपो संघ को पड़ाव के रूप में मदरसा की जगह उपलब्ध कराया था. सावन मास में पुलिस बल रखने निगम ने एक माह के लिए जगह मांगा. इसके बाद डाक कर दिया. हमलोग रोड टैक्स पहले से दे रहे हैं. पड़ाव सुविधा मिले बिना शुल्क नहीं देंगे. निगम ने दबाव बनाने के लिए एक भी गाड़ी पकड़ा, तो हम लोग विरोध में निगम परिसर में गाड़ी सहित सपरिवार बैठ जायेंगे. इसकी जवाबदेही निगम की होगी. इधर, जसीडीह टेंपो संघ ने बैठक कर एकमुश्त 1800 रुपये देने से मना किया है. संघ के अध्यक्ष देवनंदन झा उर्फ नुनु ने कहा कि शहर में अधिकांश टेंपो हर दिन नहीं चलती है. जिस दिन गाड़ी चलेगी, शुल्क देने के लिए तैयार हैं. एक भी टेंपो पकड़ने पर जोरदार आंदोलन करेंगे.

दोनों संघों की राय अलग-अलग
देवघर व जसीडीह टेंपो संघ का मत एक नहीं है. पड़ाव शुल्क के मामले में दोनों के अलग-अलग राय सामने आ रहे हैं. देवघर संघ ने बिना पड़ाव के एक भी रुपये देने से मना कर दिया है. नो सुविधा,नो शुल्क की नीति पर चल रही है. वह गाड़ी पकड़ने पर जोरदार आंदोलन की धमकी दे रही है, जबकि जसीडीह संघ पांच रुपये प्रतिदिन देने के लिए तैयार है. वह एकमुश्त 1800 देने से मना कर रहा है. वह भी गाड़ी पकड़ने पर चक्का जाम करने की चेतावनी दे रहा है.

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