जिला कल्याण कार्यालय का हाल
देवघर : जिला कल्याण विभाग की जीप के चालक सुनील कुमार दास जनवरी 2016 से बीमार हैं. साथ ही मेडिकल जांच में उन्हें अनफिट करार दिया गया है. बीमार जीप चालक अपने बेटे विक्रम कुमार दास को गाड़ी चलाने के लिए अनुमति देने की गुहार जिला कल्याण पदाधिकारी से लगाते रहे, लेकिन कोई अनुमति नहीं दी गयी. बावजूद दो वर्षों तक उनके बेटे विक्रम कुमार दास सरकारी गाड़ी चलाते रहे. इस दौरान उनके वेतन का भुगतान अस्वस्थ पिता को होता रहा.
इसका खुलासा 04 दिसंबर, 2017 को जिला कल्याण पदाधिकारी देवघर के योगदान के बाद हुआ. जिला कल्याण पदाधिकारी के योगदान के बाद जीप चालक आवेदन के माध्यम से छुट्टी लेकर 09 जनवरी, 2018 से इलाज के लिए भी चले गये. आवेदन में उल्लेख किया गया है कि वाहन चलाने में असमर्थ हूं. 06 जनवरी, 2018 को चिकित्सक द्वारा दृष्टि दोष बताया गया. साथ ही आॅपरेशन व बेड रेस्ट की सलाह दी गयी. अब जीप चालक सुनील कुमार दास द्वारा 06 अप्रैल, 2018 को जिला कल्याण पदाधिकारी को दिये गये आवेदन में कहा गया है कि मैं ड्यूटी पर योगदान दे सकता हूं, क्योंकि डॉक्टर ने फिटनेस का प्रमाण पत्र जारी कर दिया है. अब जिला कल्याण पदाधिकारी भी आश्चर्यचकित हैं कि आखिर किसकी अनुमति से बेटे को सरकारी गाड़ी चलाने दी गयी. बगैर बॉयोमीट्रिक में अटेंडेंस बनाये उनका भुगतान भी कैसे होता रहा.
डीडब्ल्यूओ द्वारा पूछा गया कारण, लिपिक ने दिया जवाब: नोट सीट के माध्यम से जिला कल्याण पदाधिकारी द्वारा 08 दिसंबर, 2017 को कार्यालय लिपिक से पूछा गया कि सुनील कुमार दास के अस्वस्थ होने की स्थिति में विभागीय वाहन कौन चला रहे हैं, तथा कब से स्पष्ट करें. 09 दिसंबर, 2017 को कार्यालय लिपिक द्वारा जवाब दिया गया कि कार्यालय उपस्थिति पंजी एवं लॉक बुक के अवलोकन से प्रतीत होता है कि उपस्थिति पंजी में सुनील कुमार दास चालक का हस्ताक्षर 04 दिसंबर,2017 तक है. लॉक बुक भी उन्हीं के द्वारा भरा गया है. ईंधन कूपन में भी उन्हीं का हस्ताक्षर अंकित है. इससे स्पष्ट होता है कि विभागीय वाहन सुनील कुमार दास चालक चला रहे हैं.
06 दिसंबर, 17 के नोट सीट में लिपिक ने अनफिट होने की कही बात : विभाग के नोट सीट में लिपिक द्वारा 06 दिसंबर, 2017 को उल्लेख किया गया है कि चालक सुनील कुमार दास का आवेदन पत्र 12.05.16 को संचिका के माध्यम से दिया गया था. जिला यक्ष्मा पदाधिकारी देवघर द्वारा जांच रिपोर्ट में चालक को अनफिट होने का प्रमाण पत्र दिया गया.
जीप चालक द्वारा बीमारी व मेडिकल अनफिट की जानकारी दी गयी. बगैर अनुमति के उनके बेटे ने गाड़ी चलायी. मेरे योगदान के बाद जानकारी मिलने पर तत्काल जीप चालक के बेटे को स्टॉप कर दिया गया. पूरा मामला जांच का है.
– बृज बिहारी राय, जिला कल्याण पदाधिकारी देवघर
