इन्वेंटरी रिपोर्ट सिविल एसडीओ को सौंपा गया
पोड़ैयाहाट : बीते तीन दिन पूर्व तीन सालों से बंद पोड़ैयाहाट के सीएचसी के स्टोर का ताला खुलने के बाद दवाई बर्बाद होने के मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. जबकि स्वास्थ्य विभाग के प्रति सरकार लाखों रुपये खर्च कर रोगियों के स्वास्थ्य के लिए कार्यक्रम चला रही है. बावजूद इस दिशा […]
पोड़ैयाहाट : बीते तीन दिन पूर्व तीन सालों से बंद पोड़ैयाहाट के सीएचसी के स्टोर का ताला खुलने के बाद दवाई बर्बाद होने के मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. जबकि स्वास्थ्य विभाग के प्रति सरकार लाखों रुपये खर्च कर रोगियों के स्वास्थ्य के लिए कार्यक्रम चला रही है. बावजूद इस दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई होता नहीं देख स्वास्थ्य विभाग पर प्रश्न चिह्न लगता हुआ दिख रहा है. सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले पर विभाग लीपापोती करना चाहता है.
हालांकि पोड़ैयाहाट प्रखंड के राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे पूरी तरह से गंभीर मामला बताया है. प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष देवेंद्र नाथ सिंह एवं उपाध्यक्ष राजीव भगत उर्फ डब्लू ने कहा कि प्रखंड बीस सूत्री के टीम के द्वारा पूरे मामले की जांच कर रघुवर सरकार को रिपोर्ट सौंपी जायेगी. इधर ग्रामीणों का कहना है कि अविलंब इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए. इधर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी कृष्णा दास एवं कनीय अभियंता प्रमोद राम ने बताया कि इन्वेंटरी सूची पर हस्ताक्षर हो गया है.
मुखिया के गैरमौजूदगी में हुई ग्राम सभा
चारा घोटाला में 37 दोषी करार, पांच बरी
फरार पांच अभियुक्तों के खिलाफ वारंट जारी
इन्हें दोषी करार दिया गया
71 आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ था मामला, 60 के खिलाफ चार्जफ्रेम
चारा घोटाला से जुड़ा यह मामला दुमका कोषागार से 34 करोड़ 91 लाख 54 हजार रुपये की अवैध निकासी से संबंधित है. 1991-92 अौर 1995-96 की अवधि में सरकारी खजाने से अवैध तरीके से राशि की निकासी की गयी थी. मामले में 71 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में पशुपालन विभाग के अधिकारी,
पशु चिकित्सक अौर आपूर्तिकर्ता शामिल हैं. इसमें कोई भी राजनेता नहीं है. अवैध निकासी से संबधित मामला दुमका टाउन थाना में 22 फरवरी 1996 को दर्ज कराया गया था. सीबीआइ में यह मामला 15 अप्रैल 1996 को आया था. 60 आरोपियों के खिलाफ चार्जफ्रेम किया गया था. 42 के खिलाफ ट्रायल चल रहा था. 14 आरोपियों का निधन हो चुका है.
दो ने पूर्व में ही अपराध स्वीकार कर लिया है. पांच आरोपी फरार चल रहे थे. इस मामले में सीबीआइ ने 197 गवाहों की गवाही दर्ज करायी जबकि बचाव पक्ष की अोर से महज तीन गवाही दर्ज हुई. एक आरोपी का मामला हाईकोर्ट से क्वैश हो गया है. इस मामले में सीबीआइ ने पांच आरोपियों को गवाह बनाया था. इनमें डॉ मो सईद, रामेश्वर चौधरी, शिव कुमार पटवारी, नरेश प्रसाद अौर शैलेश प्रसाद सिंह शामिल हैं.