अनिता देवी हत्याकांड में सास गिरफ्तार

देवघर : कुंडा थानांतर्गत चितोलोढ़िया गांव निवासी अनिता देवी हत्याकांड में पुलिस ने उसकी सास बगुला देवी कोगिरफ्तार किया है. पुलिस अभिरक्षा में उसे कोर्ट में पेश कराया गया. कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया. मामले में अनिता के पति प्रमोद सहित अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस […]

देवघर : कुंडा थानांतर्गत चितोलोढ़िया गांव निवासी अनिता देवी हत्याकांड में पुलिस ने उसकी सास बगुला देवी कोगिरफ्तार किया है. पुलिस अभिरक्षा में उसे कोर्ट में पेश कराया गया. कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
मामले में अनिता के पति प्रमोद सहित अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने छापेमारी की, लेकिन वे सभी फरार मिले. चार अप्रैल से अनिता ससुराल से गायब थी और उसका शव सात अप्रैल को घर के समीप कुएं से बरामद हुआ था. अनिता के पिता गिरिडीह जिले के बैंगाबाद थाना क्षेत्र के गेनरो गांव निवासी बेनी साव ने कुंडा थाने में अपनी पुत्री को गायब करने की एफआइआर शव मिलने के दो दिन पहले दर्ज करायी थी. मामले में चितोलोढ़िया गांव निवासी दामाद पलटू उर्फ प्रमोद मंडल, समधी बासुदेव मंडल, सरलू मंडल उर्फ मनोज मंडल, सरलू की पत्नी, वासुदेव की छोटी बेटी व बासुदेव की पत्नी को आरोपित बनाया था. कहा था कि पुत्री की शादी उसने 2013 में की थी.
शादी के कुछ दिन बाद से ही ससुराल वाले अनिता को प्रताड़ित करने लगे. दहेज की मांग को लेकर मारपीट करते थे. खाना, कपड़ा आदि देना बंद कर दिये. पंचायती होने पर बात नहीं बनी. दामाद बाहर काम करते थे. घर आने पर दामाद ने पुत्री को पहुंचाने बोला. तीन अप्रैल को अनिता को लाकर उनलोगों ने ससुराल पहुंचा दिया. चार अप्रैल को मनोज ने फोन कर सूचित किया कि अनिता कहीं चली गयी है, वे लोग खोजबीन कर रहे हैं.
सिविल जज द्वितीय के आदेश पर 16 दिनों बाद जसीडीह थाने में पालोजोरी के राजकिशोर चौधरी के खिलाफ एफआइआर दर्ज
सिविल जज द्वितीय ने 21 मार्च को आदेश जारी कर जसीडीह थाना प्रभारी को दिया था कार्रवाई का निर्देश
देवघर : जसीडीह के एेतिहासिक ढनढनियां कोठी की खरीद-बिक्री मामले में सिविल जज द्वितीय ने 21 मार्च को कार्रवाई का निर्देश थाना प्रभारी को दिया था. 16 दिन बाद मामले की एफआइआर जसीडीह थाने में दर्ज की गयी है. उक्त मामला अधिवक्ता अभिषेक भारद्वाज की शिकायत पर दर्ज किया गया है. इसमें पालोजोरी थाना क्षेत्र निवासी राजकिशोर चौधरी को आरोपित बनाया गया है. फर्जी एनओसी पर जसीडीह स्थित एेतिहासिक ढनढनियां कोठी (ढनढनियां ब्रदर्स प्राइवेट लिमिटेड) को बेचा गया है.
इससे संबंधित वाद सिविल जज द्वितीय के कोर्ट में चल रहा था. कोर्ट द्वारा देवघर अंचल कार्यालय से ढनढनियां कोठी की बिक्री हेतु जारी एनओसी का सत्यापन कराया गया, तब इस मामले का खुलासा हुआ. सत्यापन में देवघर अंचल के सीओ ने कोर्ट को कहा कि 17 जून 2006 को इस जमीन से संबंधित राजकिशोर चौधरी के नाम से कोई एनओसी जारी ही नहीं हुआ है. सीओ के रिपोर्ट के आधार पर सिविल जज द्वितीय ने 21 मार्च 2018 को आदेश जारी करते हुए जसीडीह थाना प्रभारी को मामले में कार्रवाई का निर्देश दिया था. पुलिस की मानें तो अनुसंधान में जो लोग इस जमीन का खरीदें हैं उन पर भी एफआइआर दर्ज किया जा सकता है.
ढनढनियां कोठी की जमीन की अलग-अलग नौ रजिस्ट्री हुई है. ढनढनियां कोठी की रजिस्ट्री के लिए राजकिशोर चौधरी, पालोजोरी के नाम से एनओसी निकलवायी गयी थी और अलग-अलग नौ रजिस्ट्री की गयी. ढ़ंढ़नियां कोठी की जमीन पहले हेमलता राय पति हेमेंद्र कुमार राय की थी. हेमलता के कोई संतान नहीं थे. 08 मई 1957 में हेमलता ने यह संपत्ति ढ़ंढ़नियां को लिखी. इसके बाद उसकी मौत हो गयी थी.
किंतु वर्ष 1955 का हेमलता राय का डेथ सर्टिफिकेट दिखाते हुए संदीप कुमार राय को दत्तक पुत्र खड़ा किया गया. संदीप से ही राजकिशोर ने पावर ऑफ एटॉर्नी ली, जिस आधार पर ढ़ंढ़नियां कोठी की एनओसी की मांग अंचल कार्यालय से की. एनओसी अंचल कार्यालय से तो नहीं निकला, किंतु अंचल कार्यालय की फर्जी एनओसी तैयार कर 24.07.06 को नौ सेल डीड में रजिस्ट्री करा दी गयी. यह राज तब खुला जब एक व्यक्ति ने जमीन बिक्री की एनओसी दिखाने कहा. पता चला जिस एनओसी से ढनढनियां कोठी की बिक्री हुई, वह फर्जी है. ढनढनियां कोठी का एेतिहासिक महत्व भी रहा है.

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