474 महिला को नहीं मिली गाय सरेंडर होंगे 2.90 करोड़

देवघर : गव्य विकास विभाग से देवघर के 474 बीपीएल महिला को अनुदान पर मिलने वाली दो गाय इस वर्ष नहीं मिल पायी. इन चयनित 474 लाभुकों के गाय का पैसा विभाग को 31 मार्च को सरेंडर हो जायेगा. इसमें सारठ, पालोजोरी, सारवां व देवघर प्रखंड की बीपीएल महिला है. अधिकांश सारठ व पालोजोरी प्रखंड […]

देवघर : गव्य विकास विभाग से देवघर के 474 बीपीएल महिला को अनुदान पर मिलने वाली दो गाय इस वर्ष नहीं मिल पायी. इन चयनित 474 लाभुकों के गाय का पैसा विभाग को 31 मार्च को सरेंडर हो जायेगा. इसमें सारठ, पालोजोरी, सारवां व देवघर प्रखंड की बीपीएल महिला है. अधिकांश सारठ व पालोजोरी प्रखंड की महिला लाभुक शामिल है.

विभाग को इन चयनित लाभुकों से बैंक खाता नंबर व आधार नंबर कलेक्ट करना था, ताकि गाय खरीदारी की राशि डीबीटी के जरिये सीधे लाभुकों के खाते में भेजी जाये, लेकिन विभाग लाभुकों बैंक खाता व आधार नंबर नहीं कलेक्ट कर सकी. जिस वजह से विभाग को राशि वापस करनी पड़ रही है.

हालांकि, विभाग के अधिकारी से लेकर कर्मियों ने लाभुकों को कई बार बैंक खाता व आधार नंबर जमा करने के लिए सूचित किया. विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से भी लाभुकों को सूचित किया, लेकिन लाभुकों ने भी इसमें खास रूचि नहीं दिखायी. इसमें एक 50 गाय योजना की लाभुक सूर्या भारती का भी नाम शामिल है, बैंक से इन्हें ऋण स्वीकृत नहीं किये जाने पर अनुदान की राशि 7.5 लाख रूपये भी सरेंडर कर दिया जायेगा.

कृषि विभाग की टीम से नहीं ली गयी मदद
प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत अभियान चलाकर ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक खाता खोला गया है, आधार कार्ड भी अधिकांश लोगों का खोला जा चुका है. अगर गव्य विभाग विभाग इन चयनित लाभुकों से समय पर बैंक खाता नंबर व आधार नंबर कलेक्ट करने के लिए कृषि विभाग से टीम से सहयोग ली जाती तो शायद कलेक्शन हो पाता. कृषि व मत्स्य विभाग के पास जनसेवक, कृषक मित्र, मत्स्य मित्र, आर्या मित्र व उद्यान मित्र जैसे लोगों की टीम है, बावजूद इन लोगों से मदद नहीं ली गयी.
कहते हैं पदाधिकारी
गव्य विकास विभाग से चालू वित्तीय वर्ष में कुल 1700 में 1226 बीपीएल महिलाअों के बीच अनुदानित गाय का वितरण कर दिया गया. शेष 474 लाभुकों ने बैंक खाता व आधार नंबर देने में रुचि नहीं दिखायी. विभाग में पदाधिकारी व कर्मियों की कमी रहने के बाद भी दूध मित्र के साथ कई बार लाभुकों से बैंक खाता व आधार नंबर मांगा जा चुका है. फिर भी लाभुकों ने गंभीरता नहीं दिखायी. फिलहाल 2.90 करोड़ रूपये विभाग को सरेंडर किया जा रहा है. अगले वित्तीय वर्ष इन लाभुकों को गाय देने पर निर्णय लिया जायेगा.
– संजीव रंजन, जिला गव्य विकास पदाधिकारी,

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