2611 मरीजों की नेत्र जांच 450 का होगा ऑपरेशन

950 मरीजों को दिया गया चश्मा 25 डॉक्टर की थी टीम देवघर : जसीडीह के साधना आश्रम में सीकर नागरिक परिषद कोलकाता, स्वामी रामदास चैरिटेबल ट्रस्ट साधना आश्रम तथा लायंस हॉस्पिटल रानीगंज की ओर से दो दिवसीय फ्री नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया. इसका उद्घाटन श्रम मंत्री राज पलिवार, विधायक नारायण दास, डिप्टी […]

950 मरीजों को दिया गया चश्मा

25 डॉक्टर की थी टीम
देवघर : जसीडीह के साधना आश्रम में सीकर नागरिक परिषद कोलकाता, स्वामी रामदास चैरिटेबल ट्रस्ट साधना आश्रम तथा लायंस हॉस्पिटल रानीगंज की ओर से दो दिवसीय फ्री नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया. इसका उद्घाटन श्रम मंत्री राज पलिवार, विधायक नारायण दास, डिप्टी मेयर नीतू देवी व पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष सुरेश भारद्वाज ने किया. शिविर के पहले दिन कोलकाता से आयी 25 डॉक्टरों की टीम ने क्षेत्र के 2611 मरीजों की आंखों की जांच की. इसमें 450 मरीजों की जांच में उनकी आंखों में काफी दिक्कतें पायी गयी तथा उनका ऑपरेशन कराया जायेगा. वहीं 950 मरीजों को चश्मा दिया गया तथा 1211 मरीजों की जांच कर दवा दी गयी. इस अवसर पर घनश्याम प्रसाद शोभासरिया, श्याम सुंदर धानुका, नरेश मावड़िया, रवि शंकर सीकरिया, वार्ड पार्षद कन्हैया दूबे, अनिल कुमार पोद्दार समेत अन्य मौजूद थे.
श्रम मंत्री ने कहा
श्रम मंत्री राज पलिवार ने कहा कि सीकर परिषद इसे एक महायज्ञ की तरह मानते हैं. गरीब व असहाय लोगों के लिए ऐसी सोच सराहनीय है. मारवाड़ी समाज के लोग ऐसे काम में हमेशा बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं. नर सेवा ही नारायण सेवा है. गरीब व असहाय लोग अपनी आखों से देख सके, इससे उनके चेहरे में खुशी आती है.
विधायक ने कहा
विधायक नारायण दास ने कहा कि सीकर परिषद यह काफी उत्कृष्ट कार्य है, इससे क्षेत्र के गरीब-असहाय लोगों के चहरे पर खुशी देखने को मिलती है. सामाजिक कार्य से गरीबों के चहरे पर खुशी लाना परिषद के साथ हमारा परम धर्म है.
सिटी
बोतलों के भरोसे दफ्तरों की बुझ रही प्यास
गर्मी में हर तरफ पानी के लिए हाहाकार मची हुई है. अस्पताल हो या थाना, फिर चाहे सरकारी कार्यालय हर जगह पानी के लिए मारामारी मची है. पानी का समुचित प्रबंध नहीं होने के कारण यहां आने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. साहेब हो या आम जनता सबों को पानी के लिए बोतल पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है. कई कार्यालय में तो इक्का-दुक्का आरओ लगा दिये गये हैं, लेकिन कर्मियों व यहां पहुंचने वाले लोगों की प्यास बुझाने में ये नाकाफी साबित हो रहे हैं. कई साहेब तो घरों से पानी ले आते हैं और कई बोतल खरीद कर प्यास बुझा लेते हैं. कहीं बाबू लोग तो पानी छिपाकर रखते हैं ताकि कोई मांग न ले. लेकिन, सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से तपती दोपहरी में आने वाले ग्रामीणों को पानी नसीब नहीं होता है. गले की प्यास बुझाने के लिए इन्हें मजबूरन पानी खरीदकर पीना पड़ता है. सरकारी कार्यालयों में पानी की व्यवस्था का पड़ताल करने पर जो स्थिति दिखी वह हैरान करने वाली थी.

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