जांच टीम में हेड क्वार्टर के पदाधिकारी व केंद्रीय यूनियन के प्रतिनिधि थे शामिल
कॉलोनी के मरम्मत कार्य, स्वच्छता, पेयजलापूर्ति आदि की पड़ताल की
कहा: हेड क्वार्टर से मिलते हैं पैसे पर नहीं होता काम
चितरा : चितरा कोलियरी में हुए वेलफेयर कार्यों की जांच में शुक्रवार को इसीएल हेड क्वार्टर से पदाधिकारियों व यूनियन प्रतिनिधियों की टीम पहुंची. टीम में शामिल जीएम वेलफेयर आरके श्रीवास्तव, जीएम सीएमएस एसी मिश्रा आदि ने कार्यों की बारीकी से पड़ताल की. टीम ने कोलियरी अंतर्गत कॉलोनियों में हुए मरम्मत कार्य, स्वच्छता, पेयजलापूूर्ति, अस्पताल की व्यवस्था आदि का जायजा लिया. इस दौरान उन्हें काफी गड़बड़ियां देखने को मिली. मौके पर चितरा कोलियरी के महाप्रबंधक पवन कुमार सिंह, क्षेत्रीय कार्मिक प्रबंधक बीटी कटारे, अभियंता कम्पनी पासवान, प्रभारी एरिया इंजीनियर सिविल केके मीणा के अलावे चितरा शाखा के यूनियन प्रतिनिधि महेंद्र प्रसाद राणा, पशुपति कोल, कृष्णा सिंह, योगेश राय, मनोज तिवारी, केशव नारायण सिंह, द्रोण सिंह, गोपाल कृष्णा समेत अन्य थे.
डायरेक्टर व सीएमडी से करेंगे बात
हेड क्वार्टर से आये इंटक के गणेश राय, एटक के शैलेंद्र सिंह, बीएमएस के तापस दत्त, एचएमएस के नागेश्वर मोदी आदि ने कहा कि उनके पास पहले भी चितरा कोलियरी में कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी. उन्होंने कहा कि जांच से पहले पूर्व स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता ने भी बहुत सारे मुद्दा उठाये. उनके द्वारा कोलियरी में टेंडर प्रक्रिया ठीक से नहीं होने की बात कही. साथ ही कहा कि यदि टेंडर हो भी जाता है तो कैंसिल कर दिया जाता है. यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि जांच के बाद एक बात सामने आयी कि हेड क्वार्टर से यहां मिले पैसे का ठीक से काम नहीं होता. कमरा, बिजली, नाली जो भी देखा कहीं कुछ भी ठीक नहीं है. इस मुद्दे को लेकर हेड क्वार्टर में डायरेक्टर व सीएमडी से वार्ता करेंगे.
वेलयफेयर के नाम पर मची है लूट
पूर्व स्पीकर शशांक शेेखर भोक्ता ने कहा कि वेलफेयर कमेटी की बैठक थी. इसे चुपचाप दफनाने की व्यवस्था की जा रही थी. इसलिए दखल देनी पड़ी. दो महीने पहले भी तीन करोड़ का टेंडर हुआ था, जिसे कैंसिल कर दिया गया. ऐसा इसलिए किया गया कि सरकार को इसमें 50 लाख की बचत हुई. फिर टेंडर निकाला गया जिसमें यह राशि ठेकेदारों के पॉकेट में चली गयी. कहा कि वेलफेयर के नाम पर यहां लूट मची है.
