सिमरिया. थाली नदी पर पुल न बनने की समस्या पिछले दस वर्षों से ग्रामीणों के जीवन को प्रभावित कर रही है. देल्हो से जांगी गांव जाने वाली सड़क पर स्थित इस नदी में बरसात के दिनों में पानी लबालब भर जाता है, जिससे जांगी, चौराही, मंझली टांड, जरही, करहनीबाग जैसे गांव टापू बन जाते हैं. लगभग पांच हज़ार लोग इस स्थिति से प्रभावित होते हैं. बच्चों का विद्यालय जाना बंद हो जाता है, बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना कठिन हो जाता है और ग्रामीणों का पंचायत व जिला मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है. जिला मुख्यालय जाने के लिए पांच किमी की दूरी तय करनी पड़ती है पुल के अभाव में लोगों को एक किलोमीटर की जगह पांच किलोमीटर लंबा रास्ता तय कर देल्हो चौक पहुंचना पड़ता है. इसके बाद ही वे प्रखंड या जिला मुख्यालय तक पहुंच पाते हैं. इस असुविधा के कारण ग्रामीणों में गहरी नाराज़गी है. मुखिया वीणा देवी और उप मुखिया सुनीता देवी ने कहा कि बरसात के दिनों में पुल न होने से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है. समाजसेवी आशीष भोगता, छोटू यादव, अरुण कुमार, धर्मेंद्र यादव, विजय यादव, गणेश यादव और सत्येंद्र भुइयां ने भी बताया कि पुल के अभाव में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. ग्रामीणों ने कई बार सांसद, विधायक और जिला प्रशासन से पुल निर्माण की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. यह समस्या केवल आवाजाही की नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच को भी बाधित करती है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुल का निर्माण हो जाये, तो जीवन आसान हो जायेगा और विकास की राह भी खुलेगी.
थाली नदी में पुल नहीं, बरसात में आधा दर्जन गांव बन जाते हैं टापू
थाली नदी में पुल नहीं, बरसात में आधा दर्जन गांव बन जाते हैं टापू
