मयूरहंड (चतरा). हुसियां गांव में एक पोषण वाटिका है. यह पीएम श्री उत्क्रमित मध्य विद्यालय परिसर में है, जो प्रखंड मुख्यालय से दो किलोमीटर दूर है. वाटिका फलों और फूलों से गुलजार है. पोषण वाटिका, जहाँ पौष्टिक फल और सब्जियां उगाई जाती हैं, में केला का पौधा सबका ध्यान खींच रहा है. एक छात्र ने बताया कि वह हर दिन स्कूल आते हुए इस विशाल केले के गुच्छे को देखकर उत्साहित हो जाता है. लगभग 12 फीट ऊंचाई वाले पौधे में छह फीट लंबा केले का गुच्छा फल से लटका हुआ है.
यह केले से लदा गुच्छा विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों के लिए भी खास आकर्षण बना हुआ है. इसे देखने के लिए आसपास के ग्रामीण भी पहुंच रहे हैं. "इतनी बड़ी केले की फसल हमने तो अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं देखी," एक ग्रामीण ने कहा, "यह देखकर अच्छा लगा. शायद हम भी अपने घरों में ऐसे केले उगा पाएं." यह केले से लदा गुच्छा दूसरे लोगों को भी केले की खेती करने की प्रेरणा दे रहा है.
विद्यालय के प्रधानाध्यापक ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि केले के पौधे की किस्म अच्छी है. परिसर में जो सब्जी व फल का उत्पादन होता है, उसे पीएम पोषण योजना में मेनू के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है.
विद्यालय परिसर की हरियाली: फल, फूल और औषधियां
विद्यालय परिसर में सहजन के पांच, इंसुलिन के चार, आंवला के छह, अर्जुन के सात, नीम के छह, क्रौंज के चार (ये सभी औषधि वाले पौधे हैं), केला के आठ, आम के 20, जामुन के चार, कटहल के पांच (ये सभी फलदार पौधे हैं) और शो प्लांट में बोटल, क्रिसमस, अनेलो समेत दर्जनों फूलदार पौधे लगे हुए हैं.
प्रतिदिन दाल व खिचड़ी में किया जाता है सहजन के पत्ते का इस्तेमाल
मध्याह्न भोजन के दौरान बनने वाले दाल व खिचड़ी में सहजन के पत्ते का इस्तेमाल कर विद्यार्थियों और शिक्षकों को भोजन परोसा जाता है. इससे दाल व खिचड़ी का स्वाद और भी बढ़ जाता है.
