प्रभु यीशु आज हमारे जीवन में एक ज्योति के समान हैं
ईसाई धर्मावलंबियों ने रविवार को प्रभु यीशु के पुनर्जीवित होने की खुशी में ईस्टर संडे बड़े ही श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया.
प्रतिनिधि, चतरा ईसाई धर्मावलंबियों ने रविवार को प्रभु यीशु के पुनर्जीवित होने की खुशी में ईस्टर संडे बड़े ही श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया. शहर से सटे बभने स्थित संत तेरेसा चर्च में रात 12 बजे जैसे ही ईस्टर की शुरुआत हुई, चर्च मोमबत्तियों की रौशनी से जगमगा उठा और प्रभु यीशु जीवित हैं की घोषणा के साथ पूरा माहौल भक्तिमय हो गया. ईस्टर को लेकर चर्च को विशेष रूप से सजाया गया था. बड़ी संख्या में लोग चर्च पहुंचे और मिस्सा पूजा में भाग लि.। सभी ने एक-दूसरे को प्रभु यीशु के पुनर्जीवित होने की बधाई दी. इस अवसर पर फादर सुशील के नेतृत्व में विशेष प्रार्थना आयोजित की गयी. फादर नाबोर कुजूर ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा, प्रभु यीशु ख्रीस्त ने कहा था कि मैं संसार की ज्योति हूं. आज भी वह हमारे जीवन में एक प्रकाश के समान हैं, जो हमें अंधकार से निकाल कर सच्चाई और प्रेम के रास्ते पर ले जाते हैं. चर्च में जलायी गयी मोमबत्तियां पुनर्जीवित प्रभु यीशु का प्रतीक थीं. श्रद्धालुओं ने इसे प्रभु की रोशनी मानकर अपने जीवन में आशा और विश्वास का संचार किया. इसी तरह मर्दनपुर स्थित चर्च में भी फादर तिलेसफोर बाड़ा की अगुवाई में ईस्टर संडे का भव्य आयोजन किया गया. उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु के पुनर्जीवित होने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है. उन्होंने बताया कि प्रभु यीशु का जन्म जोर्डन के बेतलेहम में हुआ था. उन्होंने हमेशा प्रेम, सेवा और क्षमा का संदेश दिया. फादर तिलेसफोर ने कहा कि उनकी लोकप्रियता से ईर्ष्या करने वाले लोगों ने उन पर झूठा आरोप लगाकर सूली पर चढ़ा दिया. लेकिन मृत्यु के तीन दिन बाद, रविवार को वह पुनर्जीवित हुए. इसी स्मृति में ईस्टर संडे हर साल मनाया जाता है. ईस्टर संडे के इस पावन अवसर पर पूरे चतरा जिले के ईसाई समुदाय में उत्साह देखा गया. चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं की गयीं और प्रभु यीशु के उपदेशों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया गया.
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