इटखोरी से विजय शर्मा की रिपोर्ट
Chatra News: चतरा जिले के इटखोरी प्रखंड में पेयजल आपूर्ति की महत्वाकांक्षी योजना अधूरी पड़ी है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ‘हर घर नल’ योजना के तहत शुरू किया गया पाइपलाइन प्रोजेक्ट चार साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है. ऐसे में इस साल भी प्रखंडवासियों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं होगा और वे चापाकलों के पानी पर निर्भर रहने को मजबूर हैं. फिलहाल, स्थिति यह है कि नलों के जरिए जलापूर्ति के लिए लगाया गया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट केवल शोपीस बनकर रह गया है.
2022 में शुरू हुआ था काम, अब तक सिर्फ 60 प्रतिशत प्रगति
इस योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई थी. शुरुआत के समय यह दावा किया गया था कि 18 महीनों के भीतर हर घर तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचा दिया जाएगा. लेकिन हकीकत यह है कि अब तक केवल लगभग 60 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है. काम की धीमी गति से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और योजना पर सवाल उठने लगे हैं.
142 करोड़ की योजना, फिर भी जमीन पर अधूरी तस्वीर
यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 142 करोड़ रुपये बताई गई है. योजना को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी राज्य सरकार और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की है. इसके बावजूद इतने बड़े बजट के बावजूद काम अधूरा रहना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है. योजना के संवेदक अमरेश गुप्ता हैं, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार से लोगों का भरोसा टूट रहा है.
कछुआ चाल से काम, पूरा होने में लग सकते हैं और साल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उससे लगता है कि योजना को पूरा होने में अभी कई साल और लग सकते हैं. पाइपलाइन बिछाने का कार्य बेहद धीमी गति से हो रहा है, जिससे योजना की समयसीमा पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी है. लोगों को उम्मीद थी कि इस बार गर्मी में राहत मिलेगी, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं.
चापाकलों पर निर्भरता, गर्मी में बढ़ी परेशानी
इटखोरी के लोग अभी भी चापाकलों के पानी पर निर्भर हैं. गर्मी के मौसम में जल स्तर नीचे जाने के कारण कई चापाकल सूख जाते हैं या उनका पानी कम हो जाता है. इससे पेयजल संकट और गहरा जाता है. महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर से पानी लाने की मजबूरी बनी हुई है, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है.
योजना पूरी होती तो मिलती बड़ी राहत
अगर यह पाइपलाइन योजना समय पर पूरी हो जाती, तो प्रखंड के हर घर में नल के माध्यम से शुद्ध पानी पहुंचता. इससे लोगों को चापाकलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत से राहत मिलती. साथ ही भूगर्भ जल का संरक्षण भी संभव होता, जो पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है.
अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका
इस मामले में पेयजल आपूर्ति विभाग के कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका. इससे यह सवाल और गहरा जाता है कि आखिर इस योजना में हो रही देरी के लिए जिम्मेदार कौन है.
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लोगों में बढ़ता आक्रोश, जल्द समाधान की मांग
इटखोरी के लोगों में अब इस योजना को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को इस योजना को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए, ताकि उन्हें शुद्ध पेयजल की सुविधा मिल सके. लोगों को अब इंतजार है कि कब यह योजना पूरी होगी और उन्हें राहत मिलेगी.
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