Chatra: लावालौंग के नावाडीह-सिलदाग सड़क जर्जर हो गयी है. सड़क में कई जगह बड़े-बड़े पत्थर निकल आये हैं, जिसके कारण लोगों को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. यह सड़क सिलदाग पंचायत को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ती है. सड़क जर्जर होने से कई गांव के लोग प्रभावित हो रहे हैं. वन्य प्राणी आश्रयणी क्षेत्र होने के कारण सड़क नहीं बन पा रही है. कई बार सड़क बनाने के लिए टेंडर भी हुआ, लेकिन वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने की वजह से सड़क नहीं बन पायी. 20 साल पहले लावालौंग-पांकी पथ स्थित गड़ियानी मोड़ से नावाडीह-सिलदाग तक पथ के कालीकरण का कार्य प्रारंभ हुआ था. कुछ दूर सड़क बनने के बाद वन विभाग द्वारा रोक लगा दी गयी. उस वक्त नावाडीह से सिलदाग तक बोल्डर बिछाया गया था. वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण सड़क नहीं बन पायी. पूर्व विधायक गणेश गंझू ने आठ साल पूर्व उक्त पथ के निर्माण को लेकर आधारशिला रखी थी.
इन गांवों के लोग प्रभावित
पंचायत के सिलदाग, महुआडीह, खामडीह, नारायणपुर, नावाडीह, सौरू, हांहे, टेवना समेत कई गांव के लोग प्रभावित हो रहे हैं. उक्त पथ से लोग लावालौंग प्रखंड मुख्यालय के साथ-साथ जिला मुख्यालय आना जाना करते है. सड़क नहीं बनने से इन गांव के लोगों को काफी परेशानी हो रही है.
क्या कहते हैं लोग
सौरू गांव के पूर्व उप मुखिया बाबूलाल यादव ने कहा कि सड़क नहीं बनने से आवागमन में काफी परेशानी होती है. बीमार लोगों को इलाज के लिए लावालौंग या जिला मुख्यालय ले जाने में काफी परेशानी होती है. गफूर मियां ने कहा कि सड़क नहीं रहने से दूसरे गांव के लोग इस गांव में रिश्ता तय नहीं करना चाहते हैं. सड़क की स्थिति ऐसी है कि इस पर बाइक चलाना भी मुश्किल है़. महुआडीह के संजय गंझू ने कहा कि बोल्डर निकल जाने के कारण आये दिन दुर्घटना होते रहती है.
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