चतरा. चतरा समेत राज्य के कई जिलों में दहशत का पर्याय रहा टीएसपीसी (TSPC) का सुप्रीमो बृजेश गंझू तीन दशक से अधिक समय से उग्रवादी गतिविधियों में सक्रिय था. वर्ष 1995 से 2000 तक वह माओवादी संगठन में सक्रिय रहा, लेकिन वैचारिक मतभेद होने के बाद 2005 में उसने टीएसपीसी संगठन का गठन किया.
टीएसपीसी बनने के बाद क्षेत्र में दोनों संगठनों के बीच लंबे समय तक खूनी संघर्ष चला, जिसमें कई लोग मारे गए. 2016-17 के बाद वह भूमिगत होकर चतरा, हजारीबाग, कोडरमा, लातेहार, पलामू, गढ़वा, गुमला, लोहरदगा और रामगढ़ जिलों में संगठन का विस्तार कर रहा था.
14 साल की उम्र में बाल दस्ते में हुआ था शामिल
बृजेश गंझू ने बेहद कम उम्र में ही अपराध और उग्रवाद की राह चुन ली थी. वह मात्र 14 साल की उम्र में माओवादी संगठन के 'बाल दस्ते' के रूप में शामिल हुआ था. संगठन में सक्रियता के कारण वह जल्द ही माओवादियों के शीर्ष नेताओं के संपर्क में आ गया और कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया.
उसकी गतिविधियों को देखते हुए संगठन के बड़े नेताओं ने उसे बहुत जल्द ही बड़ी जिम्मेदारियां सौंप दी थीं.
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शिक्षा का स्तर उठाने के लिए खोला था कॉलेज, कार्रवाई के बाद हुआ बंद
क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से बृजेश गंझू ने चतरा के लावालौंग में जीएसबी (GSB) इंटर कॉलेज की स्थापना की थी. वर्ष 2011-12 में शुरू हुए इस कॉलेज के कारण सातवीं-आठवीं तक पढ़ाई छोड़कर बैठने वाले छात्र-छात्राओं को इंटरमीडिएट तक की शिक्षा मिलने लगी थी.
हालांकि, बाद में बृजेश पर दर्ज दर्जनों मुकदमों, एनआईए (NIA) की दबिश और पुलिस की सख्त कार्रवाई के कारण यह कॉलेज बंद हो गया.
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