सिमरिया(चतरा). जिले के सिमरिया प्रखंड अंतर्गत बन्हें पंचायत के हर्षनाथपुर गांव में वोटर लिस्ट की जाँच के दौरान बड़ी लापरवाही और समस्या सामने आई है. त्रुटियों के सुधार के नाम पर अधिकारियों द्वारा मतदाताओं से जाति और आवासीय प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं, जिसे बनाने के लिए अंचल स्तर से खतियान की मांग की जा रही है. भुइयां बाहुल्य इस गांव के करीब 300 लोगों के पास आवास के अलावा कोई जमीन या दस्तावेज उपलब्ध नहीं है.
खतियान न होने के कारण प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उनका नाम मतदाता सूची से हटाने की तैयारी की जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज है और वे लगातार मतदान करते आए हैं, ऐसे में वोटिंग अधिकार छीनने से उनकी नागरिकता पर ही संकट खड़ा हो जाएगा.
जमींदारों द्वारा बसाए गए थे परिवार
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने पंचायत के मुखिया सुधीर कुमार सिंह को समस्या से अवगत कराया है. मुखिया ने बताया कि कई दशकों पहले जमींदारों द्वारा भुइयां समाज के लोगों को रहने के लिए जमीन देकर बसाया गया था.
यह समाज लंबे समय से यहां निवास कर रहा है और सरकार द्वारा इन्हें वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन तथा आवास योजना का लाभ भी दिया जा रहा है. जमीन के दस्तावेज के अभाव में प्रमाण पत्र न बनना न केवल हर्षनाथपुर, बल्कि कई अन्य पंचायतों के गरीब परिवारों के लिए भी गंभीर संकट पैदा कर रहा है.
मुखिया ने प्रशासन से उठाई विशेष पहल कर प्रमाण पत्र जारी करने की मांग
पंचायत के मुखिया सुधीर कुमार सिंह ने जिला प्रशासन, अनुमंडल प्रशासन और अंचल प्रशासन से इस मानवीय समस्या के त्वरित समाधान की अपील की है. उन्होंने मांग की है कि भूमिहीन भुइयां समाज के लोगों के लिए नियमों में शिथिलता बरतते हुए विशेष प्रक्रिया के तहत जाति और आवासीय प्रमाण पत्र निर्गत किए जाएं.
उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण किसी भी नागरिक को उसके मौलिक मताधिकार से वंचित न किया जाए, ताकि उनकी नागरिकता की पहचान बनी रहे.
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