संवाददाता, चाईबासा
विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन को लेकर चाईबासा के हरिगुटू स्थित कला एवं संस्कृति भवन आदिवासी "हो" समाज महासभा में महासभा की सभी इकाइयों की बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश विरुवा ने की.
बैठक में चर्चा की गई कि विश्व आदिवासी दिवस का उद्देश्य केवल भीड़ जुटाना और नाच-गान करना नहीं है. कई इकाइयों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि हर वर्ष की थीम के आधार पर आदिवासी समाज को संदेश देने और सामाजिक एकजुटता के लिए आगे बढ़कर काम करना चाहिए.
आदिवासी समाज के मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक में विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम के अलावा वर्तमान में आदिवासियों की स्थिति, ज्वलंत घटनाओं और कई तरह के उत्पीड़न व शोषण के मामलों पर महासभा की ओर से चिंता जताई गई.
साथ ही आदिवासी "हो" समाज महासभा जैसे सामाजिक संगठन की भूमिका, जिम्मेदारी, नेतृत्व और आपसी तालमेल को लेकर भी सकारात्मक चर्चा हुई.
बैठक में सर्वसम्मति से ऐसे आयोजनों के लिए सभी आदिवासी समाज को महासभा परिवार की ओर से शुभकामनाएं दी गईं. "हो" समाज महासभा कला एवं संस्कृति भवन हरिगुटू में 9 अगस्त को संगठन की ओर से प्रतीकात्मक रूप से विश्व आदिवासी दिवस मनाने का निर्णय लिया गया.
महासभा की ओर से उम्मीद जताई गई कि दूर-दराज के हर आदिवासी गांव में भी विश्व आदिवासी दिवस मनाकर लोग अपनी जागरुकता, आदिवासी अधिकारों और सामाजिक एकता के प्रति जिम्मेदारी निभाएंगे. साथ ही आदिवासियत से जुड़े मामलों और कार्यक्रमों में मिल-जुलकर आगे बढ़ने के लिए कई सुझावों पर सहमति बनी.
बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में मुख्य रूप से मानकी-मुंडा संघ के अध्यक्ष गणेश पाट पिंगुवा, आदिवासी "हो" समाज महासभा के उपाध्यक्ष बामिया बारी, महासचिव सोमा कोड़ा, कोषाध्यक्ष चैतन्य कुंकल, मानसिंह सामड, छोटेलाल तामसोय, विपिन तामसोय, सेवानिवृत्त संगठन अध्यक्ष रामाय पुरती, महासचिव चंद्रमोहन बिरुवा, पूर्व अध्यक्ष केसी बिरूली, बलकेश्वर सिंकू, प्रताप सिंह बिरूली, कांडेराम बिरूली, हरिश बानरा, रामेश्वर सवैंया, रमेश चंद्र सवैंया, महिला महासभा अध्यक्ष अंजू सामड, उपाध्यक्ष नागेश्वरी जारिका, युवा महासभा महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम, धर्म सचिव सोमा जेराई, जिलाध्यक्ष शेरसिंह बिरूवा, बबलू सिंकू, आशीष तिरिया, सुरेंद्र पुरती, सत्यव्रत बिरूवा और कमलेश बिरूवा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे.
