प्रतिनिधि, जैंतगढ़
जगन्नाथपुर प्रखंड के बुढ़ाकमान गांव में चंद्र मोहन तिरिया को हाथी ने पटक कर मार दिया. इस घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. हाथी के ऐसे खतरनाक हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
बताया जाता है कि जैंतगढ़ और आसपास के इलाके अब हाथियों के आने-जाने वाले क्षेत्र बन गए हैं. पहले धान पकने के समय हाथियों का आगमन होता था. अक्तूबर से जनवरी तक हाथी जंगल से जुड़े गांवों में दिखाई देते थे. लेकिन अब सालभर हाथी नजर आ रहे हैं. कुछ जंगल उनके पक्के ठिकाने बन गए हैं.
अब हाथी दूर के गांवों के बाद रिहायशी इलाकों और गांवों में भी परेशानी पैदा कर रहे हैं. कई बार ये शहरी क्षेत्र में भी पहुंच जाते हैं. चंपुआ वन क्षेत्र में अभी भी 23 हाथियों का झुंड अलग-अलग समूहों में बंटकर परेशानी पैदा कर रहा है.
इस झुंड के दो हाथी वैतरणी नदी पार कर झारखंड के जैंतगढ़ क्षेत्र में पहुंच गए हैं. ये दोनों हाथी अभी भी दीदी बरु जंगल में रह रहे हैं. ये हाथी कभी ढकवा जंगल, कभी महली मुरूम, कभी बूढ़ा खमण, कभी दावबेड़ा बिट, तो कभी कुकुर भूखा और हिंदे बरु जंगल में दिखाई दे रहे हैं.
ग्रामीण रात में हाथियों के आने पर अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें भगाते हैं. इसी दौरान बूढ़ाकमान में एक व्यक्ति की जान चली गई.
घटना के बाद गांवों में डर का माहौल
इस घटना के बाद कोलमसाई, कुंदरीझोर, तेंतोड़ीपोसी, सोसोपी, कूदाहातु, बूढ़ाकमान, दावबेड़ा, मानिकपुर, ब्रह्मपुर, डीपासाई, जामपानी, देवगांव, सियालजोड़ा, गारदीसाई, मसाबिल, लखीपाई, घुमरिया, मंडल और जलडीहा आदि गांवों के लोग काफी डरे हुए हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की ओर से सही व्यवस्था नहीं की जा रही है. हाथी प्रभावित गांवों में न तो नियमित गश्त होती है और न ही सूचना देने पर समय पर टीम पहुंचती है. ग्रामीणों को अब तक हाथियों से बचाव के लिए टॉर्च, मशाल और पटाखे जैसी जरूरी चीजें भी नहीं दी गई हैं.
ग्रामीणों ने वन विभाग से मदद की मांग की
श्रीनिवास तिरिया ने वन विभाग से हाथियों को खदेड़ने, हाथी प्रभावित गांवों में लगातार निगरानी रखने और ग्रामीणों को टॉर्च आदि की व्यवस्था देने की मांग की है. सरिक रजा ने भी हाथियों से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है.
