यहां हर गली-मोहल्ला में मरीज, जानें किस बीमारी का साया

जैंतगढ़ और चंपुआ के सीमावर्ती क्षेत्रों में वायरल, टाइफाइड और मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ा है। लक्षणों और डॉक्टरों द्वारा दी गई सावधानियों के बारे में जानें।

जैंतगढ़ : चंपुआ से जैंतगढ़ तक इन दिनों शायद ही कोई ऐसा गली-मोहल्ला हो, जहां मौसमी बीमारी से आक्रांत मरीज न मिल रहे हों. बारिश और जलजमाव के बीच वायरल ने तेजी से पैर पसार लिया है. कई घरों में एक व्यक्ति के बीमार पड़ने के बाद पूरा परिवार इसकी चपेट में आ रहा है. वायरल के साथ फ्लू, सर्दी-जुकाम और टायफायड के मरीज भी बढ़ रहे हैं. वहीं, जैंतगढ़-चंपुआ क्षेत्र में करीब तीन साल बाद मलेरिया के मामले भी सामने आने लगे हैं. डायरिया के मरीज भी मिल रहे हैं.

बारिश के साथ बढ़ा मौसमी बीमारियों का प्रकोप

बरसात शुरू होते ही चंपुआ अनुमंडल में मौसमी बीमारियों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है. सीमावर्ती क्षेत्र और वैतरणी नदी तट से सटे गांवों में इसका असर अधिक दिखाई दे रहा है. अभी सबसे ज्यादा मरीज वायरल और टायफायड के सामने आ रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में भी बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में हैं.

तेज बुखार से बदन दर्द तक, ये हैं लक्षण

वायरल में सिर दर्द, हाथ-पैर और कमर में दर्द, शरीर में ऐंठन के साथ तेज बुखार की शिकायत हो रही है. कुछ लोगों को कफ, सर्दी-जुकाम और फ्लू की समस्या भी है. साथ ही उल्टी-दस्त और खुजली की शिकायत भी सामने आ रही है. सामान्य तौर पर बुखार तीन से पांच दिन तक रह रहा है. इस दौरान मुंह का स्वाद खराब होने और कमजोरी की शिकायत भी हो रही है. टायफायड के मरीजों में लगातार तेज बुखार के साथ पेट दर्द की शिकायत हो रही है. दिन चढ़ने के साथ बुखार तेज होने की बात भी सामने आ रही है.

लापरवाही पड़ सकती है भारी

मौसमी बुखार, वायरल और फ्लू में लापरवाही करने पर स्थिति गंभीर हो सकती है. ऐसे मामलों में टायफायड और इसके बाद निमोनिया तक पहुंचने का खतरा बताया जा रहा है. चंपुआ अनुमंडल अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सक दास महापात्र ने कहा - मौसम में उतार-चढ़ाव के दौरान मौसमी बीमारियां बढ़ जाती हैं. फिलहाल वायरल का प्रकोप अधिक है और टायफायड के मामले भी सामने आ रहे हैं.

डॉक्टरों की क्या है सलाह

डॉक्टर ने लोगों से घर और आसपास साफ-सफाई रखने, ताजा और पौष्टिक भोजन करने, बारिश में भीगने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है. पानी को गर्म कर गुनगुना होने के बाद पीने, बासी खाना नहीं खाने और कूलर-एसी का इस्तेमाल कम करने को कहा गया है. जंगली मशरूम और खेत की मछली खाने से भी बचने की सलाह दी गयी है. बीमारी होने पर अस्पताल पहुंचकर जांच कराने और डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवा लेने की अपील की गयी है.


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By Md Nadeem

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