जैंतगढ़ : प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से बदहाल वैतरणी पुल की स्थिति लगातार बिगड़ रही है. लोग पुल की मरम्मत की मांग कई बार कर चुके हैं. हर बार सिर्फ आश्वासन मिला. कुछ स्थानीय लोगों ने बीते 14 जनवरी को पुल के गड्ढों को भरने के लिए खुद मिट्टी-मुरूम डाल दी थी. बारिश से समूचे पुल और एप्रोच सड़क पर भारी कीचड़ भर गया है. हालात यह हैं कि लोग पैदल पार करने को तरस रहे हैं. बाइक सवार वाहन स्किड करते हुए जान जोखिम में डालकर किसी तरह पुल पार कर रहे हैं. चंपुआ के कई लोग चाहकर भी स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में शामिल होने नहीं जा सके.
छोटे वाहनों के गुजरने से पुल पर हो रहा कंपन
यह वैतरणी पुल कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकता है. पुल पर बड़े-बड़े खतरनाक गड्ढे हो चुके हैं. कई स्थानों से लोहे की सरिया भी बाहर निकल आयी है. पुल का एग्जिट होल (निकासी छिद्र) बंद होने के कारण वहां हमेशा पानी जमा रहता है. वहीं, पुल के दोनों किनारों की एप्रोच सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गये हैं. स्थिति यह है कि अब छोटे वाहनों के गुजरने मात्र से पुल पर कंपन (वाइब्रेशन) महसूस होने लगी है, जो किसी बड़े खतरे का संकेत है.
ओडिशा और झारखंड की लाइफलाइन है यह मार्ग
यह वैतरणी पुल सड़क मार्ग का अति महत्वपूर्ण हिस्सा है. राष्ट्रीय राजमार्ग-20 पर स्थित यह पुल झारखंड और ओडिशा की राजधानियों को आपस में जोड़ता है. दोनों राज्यों के दर्जनों बड़े शहर इसी मार्ग से जुड़े हैं. यह एक बेहद महत्वपूर्ण व्यावसायिक पुल भी है, जिससे जोड़ा और बड़बिल खनन क्षेत्र का कच्चा माल इसी सड़क मार्ग से झारखंड पहुंचता है. इसके अलावा, जैंतगढ़ और चंपुआ के आम नागरिकों के रोजमर्रा के आवागमन के लिए यह पुल किसी लाइफलाइन से कम नहीं है.
