झींकपानी: झारखंड सरकार के मंत्री दीपक विरुवा की ओर से लगभग एक वर्ष पूर्व विधायक मद से स्वीकृत एंबुलेंस विभागीय अफसरों की निजी सवारी बनकर रह गयी है. टोंटी प्रखंड अंतर्गत पालीसाई स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र के अधीन आने वाले तीन दुर्गम पंचायतों (टोंटो, रंगड़ाहातू और बुंडू बांकी) के ग्रामीणों के लिए प्रदान की गयी एंबुलेंस का लाभ आज तक क्षेत्रीय जनता को नसीब नहीं हो सका है.
खाट पर जा रहे हॉस्पिटल
एक साल से एंबुलेंस की सुविधा से वंचित तीनों पंचायतों के ग्रामीणों में अब गहरा आक्रोश पनप रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि आपातकाल में आज भी मरीजों को खाट पर या निजी भाड़े के वाहनों से ले जाना पड़ता है. दुर्गम और पहाड़ी इलाके में बसी इन तीनों पंचायतों के ग्रामीणों को आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से इस एंबुलेंस की मंजूरी दी गयी थी.
नियमतः इसे पालीसाई स्वास्थ्य उपकेंद्र के अधीन संचालित होना था, ताकि स्थानीय लोगों को समय पर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया जा सके. लेकिन एंबुलेंस को ग्रामीणों की सेवा में लगाने के बजाय प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के प्रभारी को सौंप दिया गया.
मरीजों के लिए मांगे जाने पर सीएचसी प्रभारी कर देते हैं इनकार
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी टोटो, रेगड़ाहातू या बुंडू-बाकी के किसी बीमार, बुजुर्ग या गर्भवती महिला के लिए एंबुलेंस की मांग की जाती है, तो सीएचसी प्रभारी साफ शब्दों में इनकार कर देते हैं. दूसरी ओर यही एंबुलेंस आये दिन प्रखंड स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों को यहां-वहां ले जाते और निजी/विभागीय कामों में दौड़ते हुए देखी जाती है. उनका कहना है कि मंत्री के वादे और विधायक फंड के पैसे का सीधा दुरुपयोग हो रहा है.
एंबुलेंस जनता को नहीं उपलब्ध करायी गयी, तो करेंगे आंदोलन
झामुमो टोंटो प्रखंड के सोशल मीडिया प्रभारी ने कहा यदि जल्द ही एंबुलेंस को पालीसाई स्वास्थ्य उपकेंद्र में तैनात कर तीनों पंचायतों की जनता के लिए उपलब्ध नहीं करायी गयी, तो ग्रामीण सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे, कई बार जानकारी देने के बाद भी पहल नहीं की जा रही है.
