जैंतगढ़ : समग्र शिक्षा अभियान के आदेश के आलोक में स्कूली शिक्षकों और छात्रों की ऑनलाइन हाजिरी ई-विद्यावाहिनी ऐप के माध्यम से बनानी है. बायोमैट्रिक्स हाजिरी के आधार पर ही मानदेय या वेतन का भुगतान होता है. शिक्षकों को साल में 16 आकस्मिक अवकाश देय हैं. छुट्टी भी ई-विद्यावाहिनी ऐप के माध्यम से लेनी होती है. ऐप के नये वर्ज से अब शिक्षकों को छिट्टी लेने में परेशानी हो रही है.
स्कूल अवधि शुरू होने के बाद नहीं ले पा रहे छुट्टी
पहले शिक्षक स्कूल अवधि शुरू होने के बाद भी उसी दिन किसी भी समय आकस्मिक अवकाश के लिए आवेदन कर सकते थे. आधे बेला की छुट्टी का भी प्रावधान था. लेकिन, ऐप के नए वर्जन में यह व्यवस्था बदल गई है. अब स्कूल अवधि शुरू होने के बाद शिक्षक उसी दिन छुट्टी नहीं ले पा रहे हैं. ई-विद्यावाहिनी में इसका प्रावधान हटा दिया गया है. आधे बेला की छुट्टी का भी कोई विकल्प नहीं है. अब छुट्टी पहले से स्वीकृत होने पर ही मिल रही है. वरिष्ठ शिक्षक मो. जफरुल्ला अंसारी ने कहा कि आकस्मिक अवकाश का मतलब ही ऐसी स्थिति से है, जो अचानक सामने आए. स्कूल जाने के क्रम में किसी को इमरजेंसी पड़ सकती है, कोई घटना या दुर्घटना हो सकती है या कोई बीमार पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में शिक्षक उस दिन का आवेदन पहले से कैसे कर पाएंगे. अग्रिम आवेदन नहीं करने पर शिक्षक अनुपस्थित माने जाएंगे. उन्होंने सवाल उठाया कि यह कैसा नियम है.
नये प्रावधान से शिक्षकों को हो रही परेशानी
मानवाधिकार कार्यकर्ता गुरबक्श सिंह अहलूवालिया ने कहा - नियम लचीला होना चाहिए. नये प्रावधान से शिक्षकों को दो तरह की परेशानी हो रही है. न पास्ट डेट में छुट्टी लेने का विकल्प है और न ही उसी दिन सुबह 9 बजे के बाद छुट्टी ग्रांट हो रही है. ऐसे में आकस्मिक अवकाश का कोई मतलब ही नहीं रह जाता. शिक्षाविद प्रदीप प्रधान ने कहा कि लगातार तीन दिन एक मिनट देर होने पर एक दिन की हाजिरी काटने का प्रावधान है. कई शिक्षक समय पर पहुंचने की कोशिश में दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं. रास्ते में ट्रैफिक, बारिश, रेलवे फाटक जाम जैसी कई समस्याएं सामने आती हैं. उन्होंने नियम को सुगम बनाने की मांग की.
