खूंटपानी हॉर्टिकल्चर कॉलेज में दूसरे राज्यों के छात्रों का भी होगा दाखिला, आईसीएआर से मिली मंजूरी

Khuntpani Horticulture College: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के खूंटपानी स्थित उद्यान महाविद्यालय को आईसीएआर से मान्यता मिल गई है. इसके बाद अब इस कॉलेज में देश के दूसरे राज्यों के छात्र भी दाखिला ले सकेंगे. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध यह कॉलेज बीएससी उद्यान विज्ञान की पढ़ाई कराता है. ईसीएआर मान्यता से शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान, अधोसंरचना, छात्रवृत्ति और उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

खूंटपानी से शचिंद्र दाश की रिपोर्ट

Khuntpani Horticulture College: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के खूंटपानी (चाईबासा) स्थित उद्यान महाविद्यालय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से मान्यता मिल गई है. यह मंजूरी वर्ष 2025 में प्रदान की गई है. इसके बाद अब इस कॉलेज में झारखंड के अलावा देश के दूसरे राज्यों के छात्र भी दाखिला ले सकेंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि अगले शैक्षणिक सत्र से अखिल भारतीय स्तर पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.

कॉलेज को आईसीएआर मिली मान्यता

आईसीएआर की मान्यता मिलने से कॉलेज की शैक्षणिक गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. इससे मानकीकृत पाठ्यक्रम, आधुनिक अनुसंधान, अधोसंरचना विकास, छात्रवृत्ति और उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर छात्रों को मिलेंगे. यह उपलब्धि न सिर्फ संस्थान बल्कि झारखंड में उद्यानिकी शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थान

उद्यान महाविद्यालय, खूंटपानी बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कांके (रांची) के अधीन संचालित होता है. यह कॉलेज राज्य में बागवानी शिक्षा, प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है. यहां से निकलने वाले छात्र कृषि और उद्यानिकी के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं.

2018 में की गई थी स्थापना

इस महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2018 में की गई थी. शुरुआती दौर में इसकी शैक्षणिक गतिविधियां रांची स्थित विश्वविद्यालय परिसर से संचालित होती थीं. स्थायी ढांचे के विकास के बाद सितंबर 2022 में कॉलेज को खूंटपानी प्रखंड के बिंज ग्राम स्थित अपने मुख्य परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया. वर्तमान में सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य इसी परिसर से संचालित हो रहे हैं.

पाठ्यक्रम और शिक्षण व्यवस्था

कॉलेज में चार वर्षीय बी.एससी. (प्रतिष्ठा) उद्यान विज्ञान पाठ्यक्रम संचालित किया जाता है. यह पाठ्यक्रम आठ सेमेस्टर में विभाजित है और आईसीएआर द्वारा अनुशंसित डीन समिति के दिशा-निर्देशों के अनुसार पढ़ाया जाता है. सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ-साथ प्रायोगिक, क्षेत्रीय और विषय आधारित प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जाता है.

अनुभवी शिक्षक और विषय

वर्तमान में कॉलेज में कुल 17 योग्य और अनुभवी शिक्षक कार्यरत हैं. ये शिक्षक मौलिक विज्ञान, उद्यान विज्ञान, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पादप संरक्षण, सामाजिक विज्ञान और पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी जैसे विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं. छात्रों को आनुवंशिकी, जैव प्रौद्योगिकी, फल एवं सब्जी विज्ञान, पुष्प विज्ञान, मृदा विज्ञान, कीट विज्ञान, पादप रोग विज्ञान, कृषि अभियांत्रिकी और उद्यान अर्थशास्त्र जैसे विषयों की गहन जानकारी दी जाती है.

छात्र संख्या और शैक्षणिक उपलब्धियां

फिलहाल महाविद्यालय में कुल 134 छात्र अध्ययनरत हैं. अब तक यहां से चार बैच सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हो चुके हैं. ये छात्र सरकारी विभागों, निजी कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

क्या है दाखिले की प्रक्रिया

बी.एससी. (उद्यान) पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का 10+2 विज्ञान वर्ग से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है. दाखिला झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा बोर्ड (जेसीईसीईबी) के माध्यम से आयोजित परीक्षा और मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जाता है.

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प्रशिक्षण और करियर के अवसर

पाठ्यक्रम के दौरान छात्रों को ग्रामीण उद्यान कार्य अनुभव (आरएचडब्ल्यूई) और औद्योगिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है. इससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और रोजगारोन्मुखी कौशल मिलता है. डिग्री पूरी करने के बाद छात्र कृषि एवं उद्यान विभाग, निजी क्षेत्र, नर्सरी व ग्रीनहाउस प्रबंधन, प्रसंस्करण उद्योग, अनुसंधान, प्रसार सेवाओं और स्वरोजगार में करियर बना सकते हैं. इसके अलावा एम.एससी. और पीएच.डी. जैसी उच्च शिक्षा के अवसर भी छात्रों के लिए उपलब्ध हैं.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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