चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिला के चाईबासा सदर अस्पताल ब्लड बैंक में खून की भारी किल्लत हो गयी है. पिछले तीन दिनों से ब्लड बैंक में किसी ग्रुप का खून उपलब्ध नहीं है. ऐसे में अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजन खून की तलाश में भटक रहे हैं. दरअसल, ब्लड बैंक में रोज औसतन 15-20 यूनिट रक्त की खपत है, जबकि स्टॉक शून्य हो चुका है. मरीज के परिजनों की चिंता बढ़ गयी है कि आखिर जान कैसे बचेगी?.
नियमों के फेर में फंसा सिस्टम:
ब्लड बैंक में जान के संकट का मुख्य कारण हालिया नियमों में बदलाव है. चाईबासा में अक्तूबर, 2025 में पांच बच्चों को एचआइवी संक्रमित खून चढ़ाने के बाद राज्य सरकार ने रिप्लेसमेंट की प्रक्रिया बदल दी है. अब स्थानीय स्तर पर डोनेट किये गये खून को जांच और रिप्लेसमेंट के लिए जमशेदपुर (एमजीएम अस्पताल) भेजा जाता है. वहां से रिपोर्ट आने के बाद मरीजों को खून मिल पाता है. इस लंबी प्रक्रिया के कारण चाईबासा में रक्त का अकाल पड़ गया है.कहीं दो सप्ताह से इलाज अधर में, तो सिजेरियन के लिए जमशेदपुर से रिप्लेसमेंट का इंतजार
सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में उपजा रक्त संकट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मरीजों की जान पर भारी पड़ रहा है. इन दो केस स्टडीज से समझा जा सकता है कि अस्पताल में स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है.
रक्तदान शिविरों में आयी कमी:
अस्पताल कर्मियों का कहना है कि जिले में रक्तदान शिविरों का आयोजन कम हो रहा है. लोग स्वेच्छा से रक्तदान के लिए कम आगे आ रहे हैं. पिछले दिनों कुछ शिविरों से रक्त संग्रह हुआ था, लेकिन भारी खपत के कारण वह पर्याप्त नहीं साबित हुआ.
केस स्टडी-01 : दो सप्ताह से ए-पॉजिटिव खून की तलाश
मंझारी प्रखंड के एक मरीज पिछले दो सप्ताह से सदर अस्पताल में भर्ती हैं. चिकित्सकों ने उन्हें तत्काल खून चढ़ाने की सलाह दी है. मरीज को ए-पॉजिटिव ग्रुप के खून की जरूरत है. मरीज के अटेंडर ने बताया कि वे लगातार ब्लड बैंक के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन खून उपलब्ध नहीं होने के कारण इलाज आगे नहीं बढ़ पा रहा है. अब परिजनों के सामने मरीज की जान बचाने का संकट खड़ा हो गया है.
