चाईबासा: टीआरटीसी (ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर), गुइरा में आदिवासी हो समाज सेवानिवृत्त संगठन का वार्षिक अधिवेशन आयोजित किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार बागुन बोदरा व रामेश्वर सवैंया ने गोवारी कर की. इसके बाद महापुरुषों के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी. संगठन के दिवंगत सदस्यों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया.
हो भाषा-लिपि के संरक्षण पर जोर
भोजन के बाद दूसरे सत्र में वैचारिक चर्चा हुई. सुधीर लेयांगी और जगन्नाथ हेस्सा ने हो भाषा एवं लिपि के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर विचार रखे. रांची से पहुंचे आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के राष्ट्रीय संयोजक विक्टर के माल्टो ने पेसा-1996 और झारखंड सरकार के पेसा-2025 कानून की जानकारी दी. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार ने पेसा-1996 को मूल भावना के अनुरूप लागू नहीं किया है. उनके अनुसार, इसके खिलाफ मंच की ओर से उच्च न्यायालय में मामला दायर किया गया है.
परिसीमन और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा
सुरेश चंद्र सोय ने परिसीमन की जानकारी देते हुए इससे आदिवासी समाज को होने वाले संभावित प्रभावों पर चर्चा की. झारखंड पुनरुत्थान अभियान के अध्यक्ष सन्नी सिंकू, दिशुम सोसाइटी दिल्ली के अध्यक्ष कृष्ण कुमार जामुदा और डॉ. रीना गोडसोरा ने शिक्षा, स्वास्थ्य, भाषा-संस्कृति और समाजहित के मुद्दों पर संगठन की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया. अध्यक्ष रामाय पुरती ने अतिथियों व सदस्यों का स्वागत किया और नये सदस्यों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया.
कल्याण राशि एकमुश्त देने का प्रस्ताव पारित
सचिव चंद्रमोहन बिरुवा ने वर्ष 2025-26 में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक मुद्दों पर लिये गये निर्णयों की समीक्षा व अनुपालन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. कृष्ण चंद्र बिरुली ने कल्याण राशि एकमुश्त देने का अनुमोदन सदन में रखा, जिसे सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया. कोषाध्यक्ष कांडेराम बिरुली ने वार्षिक आय-व्यय व वित्तीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. धन्यवाद ज्ञापन मंगल सिंह कुंटिया ने किया. अधिवेशन में उपाध्यक्ष राम सिंह होनहागा, सह सचिव जय सिंह कुंटिया, सहायक कोषाध्यक्ष अनंत सिंकू समेत करीब 60 सदस्य उपस्थित थे.
