2017 की आग में राख हुई 56 दुकानें, अब जगी न्याय की उम्मीद...

गुदड़ी बाजार आगजनी मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट। 56 प्रभावित दुकानदारों को अब मुआवजे और न्याय की नई उम्मीद जगी है।

चक्रधरपुर | करीब नौ वर्षों से न्याय और मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे गुदड़ी बाजार आगजनी मामले में अब एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक से कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है. आयोग की कार्रवाई से 2017 में आगजनी से प्रभावित 56 दुकानदारों के बीच न्याय की नई उम्मीद जगी है.

2017 में आग लगने से 56 दुकानों में रखा सामान जलकर हो गया था राख

जानकारी के अनुसार, 19 जून 2017 को चक्रधरपुर के गुदड़ी बाजार में भीषण आग लगने से 56 दुकानों में रखा सामान जलकर राख हो गया था. इस हादसे में अनेक परिवारों की वर्षों की जमा-पूंजी और आजीविका पूरी तरह समाप्त हो गई थी. प्रभावित दुकानदार लंबे समय से उचित मुआवजा, राहत और जिम्मेदार विभागों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे. इसको लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता बैरम खान लगातार सक्रिय रहे. उन्होंने विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी मंचों पर शिकायतें दर्ज कराते हुए पीड़ित दुकानदारों की आवाज उठाई. लगभग नौ वर्षों तक लगातार पत्राचार, आवेदन, अनुस्मारक और मानवाधिकार मंचों पर पैरवी के बाद अब इस संघर्ष का बड़ा परिणाम सामने आया है.

चार सफ्ताह के अंदर एक्शन टेकेन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 06 अगस्त 2026 को मामले में एक्शन नंबर. 2 के तहत आदेश जारी किया. आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करने और चार सप्ताह के भीतर एक्शन टेकेन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि शिकायत में वर्णित तथ्यों और विभागीय जिम्मेदारियों की गंभीरता से जांच की जाए. बैरम खान ने आयोग की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा - यह केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि उन 56 परिवारों के संघर्ष की आंशिक सफलता है, जो वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आगजनी के बाद कई दुकानदार आर्थिक रूप से टूट गए, कुछ को कर्ज लेना पड़ा और कई परिवारों की आजीविका लंबे समय तक प्रभावित रही. यदि समय पर राहत और मुआवजा मिलता, तो प्रभावित परिवारों को इतनी कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता.

दुकानदारों ने जताया संतोष

प्रभावित दुकानदारों ने भी इस पहल पर संतोष जताया है. उनका कहना है कि पहली बार किसी राष्ट्रीय स्तर की संवैधानिक संस्था ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग से जवाब मांगा है. दुकानदारों को उम्मीद है कि जांच के बाद उन्हें उचित मुआवजा, पुनर्वास और राहत उपलब्ध कराई जाएगी. स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी मांग की है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें. साथ ही यह भी जांच हो कि आग लगने के कारण क्या थे, क्या विद्युत व्यवस्था में कोई लापरवाही थी, और प्रभावित लोगों को तत्काल राहत क्यों नहीं मिल सकी.


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लेखक के बारे में

By शीन अनवर

शीन अनवर वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक एवं स्नातकोत्तर तथा बी एड किया है. राजनीति, धर्म, शिक्षा के क्षेत्र में इन्होंने लंबा काम किया है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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