जैंतगढ़ : सरकारी और प्राइवेट पैथोलॉजी लैब की ब्लड टेस्ट रिपोर्ट में आ रहे बड़े अंतर ने मरीजों की चिंता बढ़ा दी है. लैब की विश्वसनीयता सीधे तौर पर मरीज की जान से जुड़ी होती है, ऐसे में रिपोर्ट में गड़बड़ी मानसिक तनाव के साथ सेहत के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है.
असामान्य रिपोर्ट से मरीज और परिजन परेशान
हाल ही में स्थानीय एनएसी के वार्ड नंबर 10 से ऐसा ही एक संवेदनशील मामला सामने आया है. यहां एक व्यक्ति अपनी पत्नी की किडनी से जुड़ी जांच (ब्लड यूरिया और ब्लड क्रिएटिनिन) कराने अनुमंडल अस्पताल गया था. सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट में ब्लड यूरिया का स्तर सीमा से बाहर 69 दर्शाया गया, जबकि क्रिएटिनिन सामान्य श्रेणी (1.3 से बढ़कर 4.0) में था. असामान्य रिपोर्ट देखकर मरीज और परिजन बेहद परेशान और हताश हो गए.
प्राइवेट लैब में सामान्य आई रिपोर्ट
संदेह होने पर जब मरीज ने दो अलग-अलग प्राइवेट लैब में दोबारा जांच कराई, तो वहां की दोनों रिपोर्ट बिल्कुल सामान्य आईं. इस घटना ने मरीज को गहरे मानसिक तनाव में धकेल दिया. स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि मरीजों की जिंदगी के साथ ऐसा खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
परिजनों ने की लिखित शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के इंचार्ज सुपरिटेंडेंट से लिखित शिकायत की है. इंचार्ज सुपरिटेंडेंट डॉ. बी.के. दास से चर्चा के बाद आश्वस्त किया कि पैथोलॉजिस्ट के आते ही मामले की गहन जांच की जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी.
