Chaibasa News : सारंडा को सेंचुरी घोषित किया गया, तो आर्थिक नाकेबंदी : लागुरी

कोल्हान-पोड़ाहाट सारंड़ा बचाओं समिती का गठन

चाईबासा. सारंडा को सेंचुरी घोषित किया गया, तो आर्थिक नाकेबंदी की जायेगी. रेल और सड़क को पूरी तरह से ठप किया जायेगा. कोल्हान-पोड़ाहाट और सारंडा से एक ढेला बाहर नहीं जाने दिया जायेगा. झारखंड में पांचवीं अनुसूची को सख्ती से लागू करने की जरूरत है. यह बातें रविवार को सारंडा के छोटानागरा स्थित जामकुंडिया बाजार में आयोजित प्रतिनिधियों की सभा में झारखंड आंदोलनकारी बुधराम लागुरी ने कही. उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में जबरन आइपीसी और सीआरपीसी की धाराओं को लागू किया जा रहा है. सारंडा को सेंचुरी घोषित करने से पूर्व राज्यपाल और राष्ट्रपति द्वारा प्रतिवेदन लिया जाना चाहिए. इसके उपरांत ही सारंडा मामले पर कोई निर्णय लिया जाना चाहिए. श्री लागुरी ने कहा कि भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची के भाग 10, अनुच्छेद 244 (ए) के तहत अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित है. इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में रहने वाली जनजातियों के कल्याण और हितों की रक्षा करना है. इसके लिए राज्यपाल को विशेष शक्तियां और जिम्मेदारियां सौंपी गयी है. पर सारंडा वन क्षेत्र में रह रहे आदिवासियों के हितों को राज्यपाल और राष्ट्रपति से बिना रिपोर्ट लिए षड्यंत्र रचकर सारंडा को सेंचुरी घोषित करने की जल्दबाजी हो रही है. इसलिए अब जनजातीय सलाहकार परिषद् द्वारा अनुसूचित जनजातियों के कल्याण से संबंधित विषयों पर राज्यपाल को सलाह देने की जरूरत है.

कोल्हान-पोड़ाहाट सारंडा बचाओ समिति का गठन :

सभा में उपस्थित लोगों ने सारंडा, कोल्हान पोड़ाहाट में जल, जंगल जमीन को बचाने के लिए संगठन की स्थापना की गयी. इसका नाम ” कोल्हान – पोड़ाहाट, सारंडा बचाओ समिति रखा गया. इस दौरान संघ के पदाधिकारियों का सर्वसहमति से चयन किया गया. इसमें मानकी लागोड़ा देवगम को अध्यक्ष, अमर सिंह सिद्धू, बिरसा मुंडा व बामिया माझी को उपाध्यक्ष, बुधराम लागुरी को महासचिव, कुसु देवगम को सचिव का चयन किया गया है. अन्य पदाधिकारियों का चयन अगली बैठक में होगी. सभा को मानकी लागोड़ा देवगम, तुराम बिरुली, विश्वनाथ बाड़ा, मो तबारक खान, माइकल तिरिया, मंगल सिंह सुरेन, बामिया माझी, बिरसा मुंडा, कृष्णा समद, प्रदीप महतो, चोकरो केराई, गोपाल कोड़ा, बरगी मुंडा, सुरेश अंगारिया, लखन बन्डिग, सजन जातरमा, ओड़िया देवगम, विश्वपाल कांडुलना, सिंगा सुरीन मुंडा, कुसु देवगम, रामो सिद्धू समेत काफी संख्या में आदिवासी- मूलवासी मौजूद थे.

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Author: ATUL PATHAK

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